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आईएसएस

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) एक शोध स्थल है जिसे पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी और यह 2011 तक बन कर तैयार होगा। मौजूदा समय तक आईएसएस अब तक बनाया गया सबसे बड़ा मानव निर्मित उपग्रह होगा। आईएसएस कार्यक्रम दुनिया की कई स्पेस एजेंसियों का संयुक्त उपक्रम है। इसे बनाने में अमेरिका की नासा के साथ रूस की रशियन फीडरल स्पेस एजेंसी (आरकेए), जपान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए), कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी (सीएसए) और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ईएसए) काम कर रही हैं। इनके अतिरिक्त ब्राजीलियन स्पेस एजेंसी (एईबी) भी कुछ अनुबंधों के साथ नासा के साथ कार्यरत है। इसी तरह इटालियन स्पेस एजेंसी (एएसआई) भी कुछ अलग अनुबंधों के साथ कार्यरत है।

पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने के बाद आईएसएस को नंगी आंखों से देखा जा सकेगा। यह पृथ्वी से करीब 350 किलोमीटर ऊपर औसतन 27,724 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से परिक्रमा करेगा और प्रतिदिन 15.7 चक्कर पूरे करेगा। पिछले आईएसएस में, जिसे नवंबर 2000 में कक्षा में स्थापित किया गया था, के बाद से उसमें लगातार मानवीय उपस्थिति बनी हुई है। मौजूदा समय में इसमें तीन व्यक्तियों का स्थान है। भविष्य में इसमें छह व्यक्तियों के रहने लायक जगह बनेगी।

अंतरराष्ट्रीय मुख्यत: एक वेधशाला के तौर पर कार्य करता है। अन्य अंतरिक्ष यानों के मुकाबले इसके कई फायदे हैं जिसमें इसमें रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहकर काम करने का मौका मिलता है।

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