DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रबंध के छात्रों का भी रुझान बढ़ा अखाड़ों की ओर

जिस प्रदेश में बॉक्सिंग, हॉकी का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है वहां के युवाओं में अब भी रेसलिंग का क्रेज कम नहीं हुआ है। इसमें प्रबंधन के गुर सीखने के बावजूद अब कुश्ती में बेहतर भविष्य देखने वालों की लंबी फेहरिस्त बनने लगी है। क्वालिटी ट्रेनिंग, व  ओलंपिक में सुशील जैसे पहलवानों के प्रदर्शन को देख, इस रास्ते गुड़गांव के दजर्नों युवा चल पड़े हैं। इसमें कई ऐसे हैं जो देश के अग्रणी प्रबंध संस्थानों के छात्र भी हैं।

पढ़ाई की शेडय़ूल टाइट होने के बाद भी खिलाड़ी सुबह-शाम नियमित अभ्यास करना नही भूलते। ऐसे ही करीब तीन दर्नज से अधिक रेसलर कल के सुशील बनने की उम्मीद लेकर कुश्ती के दाव पेंच को समझने में जुटे हैं। ताऊ देवीलाल स्टेडियम में कोच जयभगवान के दिशा-निर्देश में भावी पहलवान कुश्ती के गुर सिख रहे है। इनमें कई ऐसे पहलवान हैं जो मैनेजमेंट या दूसरे प्रोफेशनल कोर्स से जुड़े हैं। सोचने वाली बात यह है आईआईपीएम सहित देश के अग्रणी प्रंबध संस्थान से एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैँ।

कोच जयभगवान अपने चेलों को प्रतिद्वंदियों को मात देने को तैयार कर रहे है। सेक्टर-30 निवासी प्रबंधन के छात्र व भावी पहलवान प्रवीन कुमार ने का लक्ष्य ओलंपिक तक पहुंचने का है। इसके लिए वह खाली समय में स्टेडियम में जमकर पसीना बहाते हैं और बचे वक्त को पढ़ाई में लगाते हैं। दिल्ली के वेंकटेश्वर कॉलेज से बीएससी में प्रथम श्रेणी से उतीर्ण होने के बाद खुद को फिट रखने की लालसा में प्रैक्टिस करने लगे। लेकिन, कुछ दिनों बाद कुश्ती का जुनून परवान चढ़ने लगा।

अब आलम यह है कि प्रबंधन करते हुए भी कुश्ती को अधिक तवज्जो देने लगे हैं। जिला स्तर पर कई बार ईनाम जीत चुके प्रवीन पढ़ाई में अव्वल रहने के बाद अब रेसलिंग की दुनिया में लोहा मनवाने के लिए जी जान से जुटे हैं। बकौल प्रवीन यादव जब से सुशील ने ओलंपिक में पदक हासिल किए है तब से उनका हौसला और भी बुलंद हो गया है। उन्होंने कहा कि फाइनेंस और मार्केटिंग में पढ़ाई की बारीकियों को कुश्ती में भी अपनाना चाहते है। हालांकि उनके पिता सुरेश यादव की इच्छा है कि बेटा कुश्ती में नाम रोशन करे, लेकिन मां की चाहत है बेटा एमएनसी में मैनेजर बने।

कोच जयभगवान ने कहा कि उनका एक ही लक्ष्य है कि साइबर सिटी से ओलंपियन तैयार करना है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखते हुए मुझे पूरी उम्मीद है कि एक दिन मेरा सपना जरूर पूरा होगा। उन्होंने कहा कि एक बात की खुशी है कि इसमें भी अब पढ़े-लिखे ही नहीं हाई प्रोफाइल खिलाड़ी आने लगे हैं। इससे इस गेम का कल अवश्य उज्जवल होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:प्रबंध के छात्रों का भी रुझान बढ़ा अखाड़ों की ओर