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अब नहीं दिखेंगे सड़कों पर भिखारी


राजधानी की सड़कों पर लंबे समय तक भिखारी आराम से भीख मांगते नजर नहीं आएंगे। राष्ट्रमंडल खेलों के चलते सरकार ने क्लीनअप अभियान के तहत भिखारियों को शहर से हटाने  का फैसला किया है। भिखारियों के मुकदमों के शीघ्र निरस्तारण के लिए 12 मोबाइल कोर्ट व कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। कंट्रोल की सहायता के लिए पुलिस भी होगी।

राजधानी में मौजूदा समय में अनुमानित  60 हजार भिखारी समङो जाते हैं। भीख मांगना  भिक्षा रोकथाम कानून 1959 के तहत अपराध है। अगर कोई भीख मांगता पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश के तहत राजधानी में भिखारियों के खिलाफ अभियान चलाने जा रही है। दो मेट्रोपोलिटेन मजिस्ट्रेट शीघ्र ही प्रभार संभाल लेंगे और पूरे शहर में कहीं भी कोई भीख मांगता पाया गया तो उसकी खैर नहीं।

शुरू में भीख मांगने के विरोध में अभियान धौला कुआं, राजघाट व एम्स जैसे इलाकों में चलाया जाएगा। सरकार का यह अभियान राष्ट्रमंडल खेलों का ही हिस्सा है क्योंकि उस दौरान राजधानी में हजारों विदेशी मेहमान भी आएंगे। अभियान में पुलिस को भी जोड़ा जाएगा और जहां भी भीख मांगने की शिकायत आएगी, वहां मोबाइल कोर्ट जाकर भिखारी की धरपकड़ करेगी। या तो भिखारी को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा या फिर उसे कुछ समय के लिए कानून के तहत होम्स भेज दिया जाएगा।

सरकार का यह भी प्रस्ताव है कि एनजीओ द्वारा चलाए जाने वाले गैर कस्टोडियल होम्स को बढ़ावा दिया जाए ताकि भिखारियों को पुनर्वासित किया जा सके। गौरतलब है कि इस समय दिल्ली में 12 होम्स है जहां करीब 1500 भिखारी बंद हैं।

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  • Web Title:सरकार चलाएगी अभियान