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चेतना दर्पण में ही बोने होंगे बीज

एन. के. सिंह का आलेख ‘शिक्षा के अधिकार से आगे की राह’ पढ़ कर खुशी हुई। यह कानून समाज में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में बहुत बड़ा योगदान देगा। अब ‘कोई बच्चा पीछे नहीं छूटेगा’। मगर जैसा कि सिंह साहब ने सही लिखा है अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान के साथ-साथ शिक्षण की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि शिक्षा का सही लक्ष्य तो अयोग्यता को योग्यता में बदलना है, ताकि प्रापक एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाए और समस्याओं के समाधान की सूझबूझ अपने में पैदा करे। वह कौन है, उसकी क्या जिम्मेदारी है और उसे जीवन में कहां और कैसे पहुंचना है। इसकी समझ के बीज उसकी चेतना दर्पण में अगर प्रारंभिक दिनों में बो दिए जाएं तो उसे बड़ा होकर नैतिकता और भौतिक समझदारी के बीच संतुलन कायम करने में मदद मिलेगी।

डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्ली

भिखारी और वो भी ग्रेजुएट
जब आपने इतनी खोज करके यह खबर छापी है कि राजधानी में छब्बीस ग्रेजुएट एवं चार पोस्ट ग्रेजुएट भीख मांग रहे हैं तो कृपया टीवी चैनल से सम्पर्क करके उन्हें समाज के सामने लाने का प्रयास करें। यह सराहनीय होगा। देश की स्थिति इतनी भी दयनीय नहीं है कि ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट चाहे कितना भी मंदबुद्धि क्यों ना हो, काम की इतनी कमी नहीं है कि उसे भीख मांगने की नौबत आए। पब्लिक स्कूल में टीचर कीनौकरी, मोबाइल शॉप में काम, प्राइवेट बैंकों में काम, परचून की दुकान जैसे ढेरों कार्य हैं जिसे हम कुशलता पूर्वक कर सकते हैं। काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता, हमारे करने में ईमानदारी होनी चाहिए। काम की कमी नहीं है। करने की कमी है। आप उनकी मजबूरी समाज के सामने लाएं दूसरों को प्रेरणा मिलेगी।

शिव प्रकाश शर्मा, हापुड़

ऐ महरौली
ऐ महरौली तेरे हालात पे रोना आया
यहां जो आया, पीने का पानी न पाया
बिजली ने भी है सबको सताया
गली-मुहल्लों में मल-मूत्र लहराया
सीवर को किसी ने न चालू कराया
वाहनों के जाम को किसी ने न हटाया
ऐ महरौली तेरे हालात पे रोना आया।

रोशन लाल बाली,  नई  दिल्ली

आधुनिक रक्षाबंधन
रक्षाबंधन में देश भर में बहनों द्वारा अपने भाइयों को राखी बांधने के साथ-साथ मिठाई व साड़ी की खरीदारी में 600 करोड़ का कारोबार बताया है। यह आंकड़े लगभग सही हो सकते हैं। फिर भी बदलती फिज के साथ-साथ त्योहार का स्वरूप भी बदला है। मिठाई और साड़ी तो एक दशक पहले की रस्में थी। आज तो भाई-बहनों के अटूट बंधन में घड़ी, मोबाइल, स्कूटी, आभूषण, गिफ्ट व नगदी भी प्रवेश कर गए हैं। इस बार तो बाजारों की रौनक का अहसास तो सड़कों पर लगे जाम से ही हो गया था।

 राजेन्द्र कुमार सिंह,  दिल्ली

किसानों की मदद करे सरकार
उत्तर भारत में लगभग पिछले तीस सालों से वर्षा न होने से तेजी से गिरते जल स्तर से पानी का संकट लगातार बढ़ता चला जा रहा है। इसलिए उत्तर भारत के किसानों को सरकार सही सलाह और संभव आर्थिक मदद के साथ कम पानी वाली फसलों और सब्जियों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करे।

वेद, नई दिल्ली

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