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रिज्यूमे की दुविधाएं

जब आप किसी नए जॉब के लिए अपना रिज्यूमे बनाने बैठते हैं, तो कभी कभी कुछ मसलों पर आकर ठिठक जाते हैं। आप इस दुविधा में पड़ जाते हैं कि इन चीजों को रिज्यूमे में किस प्रकार डाला जाए। ये बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें रिज्यूमे में साफ-साफ दे देने से भी दिक्कत हो सकती है, और उनको बिल्कुल ब्लैक आउट करने से भी आपके लिए परेशानी पैदा हो सकती है। जैसे कि अगर आपने बार-बार जॉब बदले हैं, या आपके खिलाफ कोई फौजदारी मामला लंबित है, तो रिज्यूमे में इसके बारे में जनकारी दी जाए या नहीं? ऐसी दुविधाओं से निपटने के कुछ तरीके हम यहां दे रहे हैं।

- बार-बार जॉब बदलने या इनमें गैप होने पर उम्मीदवार में अस्थिरता का दोष देखा जाता है। इसलिए ऐसी चीजों को ढांपने के लिए रिज्यूमे में स्पष्ट बताएं कि इस दौरान आपने कौनसी ट्रेनिंग ली या कैसे फ्रीलांस असाइनमेंट पूरे किए। अगर आपने किसी कंपनी में बहुत कम समय के लिए ही काम किया है, तो उसका उल्लेख ही न करें।

- करियर में ब्रेक लिया हो, तो वापसी के समय हर किसी को सफाई देने के बजाय ऐसा रिज्यूमे बनाएं, जिसमें मुख्य-मुख्य कंपनियों में अपने जॉब सिनोप्सिस देकर निभाई गई जिम्मेदारियों का ब्यौरा दे दें।

- मंदी की वजह से नौकरी छूटी हो, और अभी तक न मिली हो, तो बिलकुल ईमानदारी से इसे स्वीकार कर लें। इसे रिज्यूमे में डालने की जरूरत भी नहीं है, सिर्फ इंटरव्यू में बता देना काफी है। बाकी अपनी काबिलियत और स्किल्स पर फोकस करें।

- अगर आप फ्रैशर हैं, तो मजबूत ऑब्जेक्टिव बनाने में मेहनत करें। रिज्यूमे में इंटर्नशिप और उन वर्कशॉप्स का उल्लेख करें, जिनमें आपने हिस्सा लिया हो।

- ऑब्जेक्टिव स्टेटमेंट स्पष्ट और सटीक होना चाहिए। अपने लक्ष्य के बारे में लिखते समय सही और असरदार शब्दों का चयन करें।

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