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गूगल, ऑरकुट.. और अब ट्विटर

क्या है ट्विटर
सीधे शब्दों में कहें, तो ट्विटर एक सोशल नेटवर्किंग साइट है, जिसमें छोटे टेक्स्ट मैसेज पोस्ट किए जाते हैं, जिसे ट्वीट्स कहते हैं। इसकी संख्या 140 कैरेक्टर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। छोटे-छोटे टेक्स्ट मैसेज व्यक्ति के प्रोफाइल पेज पर दिखते हैं। रियल टाइम डायरी इंट्री को दूसरे यूजर भी पढ़ सकते हैं, जिन्हें फॉलोअर कहा जाता है। ट्विटर के माध्यम से आप दोस्तों से रोजमर्रा की बातों को शेयर कर सकते हैं। यह मार्केटिंग और कम्युनिकेशन का मजबूत टूल बनकर उभरा है।

ट्विटर के हमराही
आकस्मिक आपदा से निपटने वाली संस्थाएं ट्विटर का इस्तेमाल मुसीबत के समय करोड़ों लोगों तक पहुचंने के लिए करती है। नासा भी ट्विटर का इस्तेमाल स्पेस शटल फ्लाइट को रोजना अपडेट करने के लिए करती है। न्यूयॉर्क के मैनहट्टन क्षेत्र के कैफे और रेस्तराओं में रोजमर्रा की गतिविधियां बताने के लिए ट्विटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। कैफे इत्यादि में बैठने लायक जगह कब खाली होगी, इसके बारे में भी ट्विटर पर जानकारी दी जा रही है।

बढ़ता ग्राफ
इसका इस्तेमाल दुनिया भर के बीस करोड़ लोग रोजना करते हैं।  इसका ट्रैफिक प्रत्येक महीने दुगनी गति से बढ़ रहा है। कंपनी में तेजी से भíतयां हो रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले एक दो महीनों में इसका आकार दुगना हो जाएगा। यह कंपनी 15 से 20 लोगों से मिल कर बनी है और वर्तमान में इसका आकार तेजी से बढ़ रहा है। गौर करने वाली बात ये है कि यह कंपनी गूगल, अमेजन और ईबे से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। ट्विटर ने पहली बार यूएस एयरवेज फ्लाइट 1549 की हडसन नदी में तस्वीर खोजी थी।

रोचक है सफलता की कहानी
ट्विटर के सह-संस्थापक बिज स्टोन का कहना है कि इसका सफलता के नए कीíतमान स्थापित करना जैसी बातें हमारा हौसला बढ़ाती हैं। अन्य वेब के इंटरप्रिन्योर्स की तरह ही विलियम्स और स्टोन की सफलता की कहानी भी बड़ी रोचक है। विलियम्स का जन्म क्लार्क के पास के सोयाबीन और कॉर्न फॉर्म के पास हुआ था। चौदह साल की उम्र तक विलियम्स खेल से लेकर बैंड तक हर गतिविधि में हिस्सा ले चुका थे। जहां विलियम्स के पिता और भाई को खेती और शिकार का शौक था, तो विलियम्स को पढ़ने और बिल्डिंग इंटरप्राइज की स्कीम बनाने का शौक था। इसके बाद उन्होंने नेब्रास्का विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, उन्होंने उस कॉलेज में कुछ ही कक्षाएं की और कुछ दिनों बाद उस कॉलेज को छोड़ दिया।

विलियम्स ने डैलास, ऑस्टिन जैसी जगहों पर टेक्नोलॉजी कंपनियों में नौकरी की। काम करने के दौरान हर समय उनके दिमाग में नया विचार कौंधता रहता था। कुछ पैसों और उद्देश्यों के साथ 1996 में विलियम्स वापस अपने फॉर्म लौट आए। विलियम्स बताते हैं कि सिलिकॉन वली में कंपनी स्थापित करना उनका सपना था, इसलिए मैंने वहां जने का फैसला किया। विलियम्स ने वहां स्वतंत्र कांट्रेक्टर के तौर पर काम किया, जो कि कंप्यूटर का कोड लिखता था। इसके अलावा, उन्होंने वहां की शीर्ष कंपनियों इंटेल और हेवलेट पैकर्ड के लिए फ्रीलांस काम किया। 1999 में विलियम्स ने एक अन्य कांट्रेक्टर मेग हाऊरीइयान के साथ मिलकर पायरा लैब्स नामक कंपनी बनाई, जिसने मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर बनाने का काम शुरू किया।

इस कंपनी ने ऐसा प्रोजेक्ट बनाया जिसकी सहायता से मैनेजर कांप्लेक्स प्रोजेक्ट को ऑनलाइन देख सकता था। पायरा ने बाजर में एक बेहतरीन इंटरप्रिन्योर के रूप में पहचान बनाई। इस कंपनी के बारे में कहा जता था कि इसे बात का फन नहीं आता कि कैसे पैसे कमाएं जएं। विलियम्स इस बात का बचाव करते हुए कहते हैं कि हमें पहले ही दिन से मुनाफा हो रहा था, लेकिन यह हमारे लिए पर्याप्त नहीं था। बाद में यह कंपनी असफल साबित हुई। इसके बाद उन्होंने दूसरी कंपनी ब्लॉगर डॉट कॉम खोली। अब बात बिज स्टोन की। बिज स्टोन को बचपन से ही ग्राफिक आर्ट और थिएटर से काफी लगाव था। मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में स्टोन ने अपनी प्रतिभा से लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा, पब्लिशर कंपनी लिटिल में उनके काम को काफी सराहा गया। वेब डिजाइन और प्रोग्रामिंग के उन्होंने कई नए प्रोग्राम बनाए। विलियम्स ने स्टोन को कंपनी बनाने के लिए आमंत्रित किया।

लीक से हटकर
कुछ ही समय में ट्विटर दुनिया की कीमती रियल टाइम इनफॉर्मेशन कैशे बन गई है और इसका प्रोफाइल लगातार फैल रहा है। लोगों के मन में इस कंपनी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं जैसे रिवेन्यू एकत्रित करने के लिए कंपनी का मॉडल क्या होगा, क्या कंपनी को बेच दिया जाएगा? लेकिन अभी विलियम्स और स्टोन ने अपनी योजनाएं गुप्त रखी हैं। तीसरे राउंड की फंडिंग में निवेशकों ने इस कंपनी में 35 करोड़ डॉलर का निवेश किया है, उनका कहना है कि उन्हें कोई जल्दी नहीं है। विलियम्स के मुताबिक इस कंपनी के लिए तीन बातें हो सकती हैं, पहला ये कि ट्विटर को पब्लिक कंपनी बना दिया जाए, दूसरा ट्विटर को प्राइवेट कंपनी ही रखा जाए और इसके निवेशकों द्वारा इसे खरीद लिया जाए और तीसरा ऐसा विकल्प जिसके बारे में अभी तक किसी ने सोचा न हो।

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