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बाकी जनपद मांग रहे शासन से करोड़ों रुपये


बारिश न होने से गाजियाबाद के किसान बर्बाद हो रहे हैं। फसलें सूख रही हैं मगर अफसरों को फिर भी उनके ऊपर छाया सूखे का संकट नजर नहीं आ रहा। सरकार ने तो दरियादिली दिखाते हुए दूसरे जिलों के साथ गाजियाबाद को भी सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है मगर यहां की प्रशासनिक मशीनरी बार-बार पूछे जाने के बाद भी शासन से किसानों की मदद के लिए सूखा राहत पैकेज नहीं मांग रही। अफसर जवाब दे रहे हैं, अभी यहां के हालात ठीक हैं तो पैकेज क्यों मांगे।

सूखाग्रस्त जिलों में गरीब और सीमांत किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने पर्याप्त राहत देने का ऐलान किया है। सरकारी मदद के लिहाज से देखें तो आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को सूखे के संकट की वजह से न केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी है, वल्कि उनको कृषि अनुदान भी दिया जाना है। प्रमुख सचिव गोविंदन नायर ने सूखाग्रस्त जिलों के जिलाधिकारियों का भेजे परिपत्र में बीस बिंदुओं पर रिपोर्ट भी भेजने को कहा है।

इसके बाद भी गाजियाबाद प्रशासन किसानों की परेशानी को नजरंदाज करने में लगा है। अफसर यह तक कहने में लगे हैं कि गाजियाबाद जैसे समृद्ध जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की जरूरत ही नहीं थी। दरअसल, अफसर शहर से बाहर तो देखने जा नहीं रहे। ऐसे में उनको देहात में सूखे का संकट ङोल रहे गरीब किसानों की मुश्किलें भी नजर नहीं आ रहीं।

गाजियाबाद जैसे ही हालात मुरादाबाद जिले के भी हैं, तो वहां के प्रशासन ने प्रदेश सरकार से किसानों के लिए 50 करोड़ का राहत पैकेज मांगा है। पश्चिमी यूपी के बाकी जिले भी शासन से करोड़ों का राहत पैकेज मांग रहे हैं मगर इस मुद्दे पर गाजियाबाद के अफसरों ने फिलहाल चुप्पी साध ली है।

सूखा राहत अधिकारी व एडीएम फाइनेंस सर्वजीत राम से इस सम्बंध में पूछा गया तो उन्होंने साफ कह दिया कि गाजियाबाद के हालात अभी खराब ही कहां हैं। जहां खराब होंगे तो शासन से पैकेज मांग लिया जाएगा। बाकी तैयारी पूरी है।

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  • Web Title:गाजियाबाद प्रशासन ने नहीं मांगा सूखा पैकेज