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मंगल पांडे के नाम पर नहीं कोई कालोनी


‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह नारा आजादी दिवस पर हर साल लगने वाले मेलों में गुनगुनाया जाता है। इसके  बाद नारा व इसके  रचियता को लोग भूल जाते हैं। फरीदाबाद के लोगों की तो जैसे यह आदत बन चुकी है। यहां की कालोनियों के नामों की सूची से नदारद ऐसे शहीदों के नाम इसका ताजा उदाहरण हैं।

बिल्डर या प्रॉपर्टी डीलर अपने सगे संबंधी के नाम पर कालोनी काट देते हैं। उन्हें शहीदों का नाम रखना नहीं सुहाता। यूं तो चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के किरदार के बिना कोई भी आजादी दिवस के मेले अधूरे हैं। मगर जीवन के साथ इनकी यादें शायद लोग जोड़कर नहीं रखना चाहते। तभी ऐसे लोगों के नाम पर कालोनियों के नाम रखे जा रहे हैं, देश की आजादी में जिनका कोई इतिहास नहीं है।

गुमनामी की जिंदगी बसर कर चुके ऐसे लोगों की दूसरी पीढ़ी कालोनी बसाकर उनके नाम चर्चित कर रही है। फरीदाबाद की करीब डेढ़ सौ कालोनी में स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे के नाम पर कोई रिहायशी क्षेत्र नहीं है। अंहिसा पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर भी स्थल नहीं। मुगलों से लड़ाई लड़ने वाले हसन खां मेवाती को भी कोई याद करना नहीं चाहता। हरियाणा के इतिहास में जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। कालोनियों के नाम पर जाति व क्षेत्र का कब्जा है।

कहीं यादव कालोनी है तो कहीं भाटिया कालोनी वजूद में है। उत्तरी मैदान में आए पहाड़ी क्षेत्र के लोगों ने पर्वतीया कालोनी बसा ली। बिना मंजूरी के काटी गई इन कालोनियों को राज्य सरकार अनुमति दे देती है। पहले 75 कालोनी पास की जा चुकी हैं। संभावना है 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ऐसे ही नामों की 51 कालोनियों को पास करने की घोषणा कर दें। नगर निगम भी सदन की बैठक में शहर के प्रमुख चौराहे, रोड आदि का नाम महापुरुषों के नाम पर रखने का प्रस्ताव पारित कर चुका है। अमल अभी तक नहीं हुआ है।

निगम के सचिव प्रताप का कहना है कि बिल्डर व प्रॉपर्टी डीलर अपनी प्रॉपर्टी पर कालोनी काटते हैं। अपनी पसंद से कालोनी का नाम रख देते हैं। जिसके आधार पर पत्रचार शुरू हो जाता है। पक्की होने के बाद नाम बदलने से लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। जिसकी वजह से नाम बदलना जनहित में नहीं दिखाई पड़ता है।

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  • Web Title:रिहायशी कालोनियों के लिए नहीं शहीदों के नाम पसंद