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22 जनवरी, 2020|11:33|IST

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सरकारी स्कूलों के सुधार में खुद शिक्षक ही बने रोड़ा

सरकारी स्कूलों के गिरते स्तर में सुधार लाने की कवायद में खुद शिक्षक ही रोड़ा बने हुए हैं। क्योंकि हाल ही में लागू नई समायोजन नीति और औचक स्कूल निरीक्षण के विरोध में शिक्षकों ने सड़क पर उतरने का मन बनाया है। जिला शिक्षा विभाग ने शासनादेश पर नई समायोजन नीति के तहत 170 से भी अधिक शिक्षकों का विभिन्न जगहों पर तबादला कर दिया था।

इसके अलावा औचक निरीक्षण में मौके पर अनुपस्थिति पाए गए करीब दो दर्जन शिक्षकों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दाखिल करने का फरमान जारी कर दिया था। इससे बौखलाए कुछ शिक्षकों ने शिक्षक संघ से शिकायत कर दी। शिक्षकों के अनुसार औचक निरीक्षण और समायोजन नीति की आड़ में डीआईएसओ और बीएसए मनमानी कर रहे हैं। शिक्षकों ने डीआईएसओ ज्योति प्रसाद को भी नहीं बख्शा है।

शिक्षकों की शिकायत पर यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ की जिला सचिव ऊषा विकल ने कहा कि शिक्षकों की शिकायत पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। अगर शिकायत सही पाई गई कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जाएगा। हालांकि जिला सचिव ने स्पष्ट कर दिया कि समायोजन और स्कूलों के औचक निरीक्षण के मामले में डीआईएसओ और बीएसए के खिलाफ नहीं जाएंगी।

डीआईएसओ ज्योति प्रसाद ने नए शैक्षणिक सत्र में लापरवाही बरतने के आरोप में अब तक दो दर्जन शिक्षकों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दाखिल करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा दस स्कूलों का रिजल्ट औसत से भी ज्यादा खराब होने के आरोप में 66 शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया गया है।

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