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सूबे की स्थिति 1966 के अकाल से भी बदतर : राजद

राजद ने सूखा के मसले पर सरकार को घेरने में पूरी ताकत झोंक दी है। इस मुद्दे पर कदम ताल करते हुए साथ चल रही है लोजपा भी। ‘भरपेट भोजन दो वरना गद्दी छोड़ दो’ के नारे के साथ दोनों दल 10 अगस्त को सड़क पर उतरेंगे। योजना है सरकारी घोषणाओं का सच जनता के सामने लाने की।
       
राजद के प्रदेश प्रवक्ता और विधानसभा में पार्टी के उपनेता शकील अहमद खां ने रविवार को कहा कि राज्य में 1966 से भी भयावह स्थिति है और सरकार अब तक केन्द्र के पास कोई मेमोरेन्डम भी नहीं भेज पाई है कि उसे कैसी मदद चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कागजी घोषणाओं का रिकार्ड बना दिया है।

प्रधान महासचिव रामकृपाल यादव की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों की हालत खराब है, उनमें सरकार के प्रति गुस्सा भी है। कई जिलों में एक प्रतिशत भी रोपनी नहीं हुई है। अनुदानित दर पर डीजल और आठ घंटे बिजली देने की घोषणा कागजी साबित हुई है। पूरे राज्य को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि कल सूबे के हर जिले में राजद-लोजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे।

वे जिलाधिकारियों को एक ज्ञापन देकर सरकार से मांग करंगे कि किसानों को प्रति कट्ठा एक हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाएं, हालात ठीक होने तक दो रुपये में भोजन के साथ दवा की व्यवस्था हो, कृषि लोन, मालगुजारी और सहकारिता लोन की वसूली स्थगित हो, कालाबाजारी रोकने के लिए कारगर कदम उठाये जाएं और जमाखोरों के गोदामों पर छापेमारी हो।

इसके अलावा पीने के लिए शुद्ध पानी और पशु चारा की पुख्ता व्यवस्था, मोटा अनाज और सब्जियों के बीज कम दाम पर उपलब्ध कराये जाने संबंधित कुल 17 सूत्री मांगे रखी जाएंगी।   

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