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झारखंड में पार्टी को मजबूत बनाने में जुटा राजद

‘राजद में वापसी के लिए पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद का पांव भी पकड़ना पड़ता तो हम पीछे नहीं हटते। राजद हमारा घर है इसको छोड़कर हम अलग नहीं रह सकते।’ वर्ष 2005 में टिकट नहीं मिलने पर बिदक कर पार्टी से अलग हो जाने वाले मजदूर नेता और पूर्व मंत्री अकलू राम महतो ने रविवार को इसी उद्गार के साथ खुद को फिर से लालू प्रसाद के ‘हवाले’ कर दिया।

अब उन्हें इस बात की चिन्ता नहीं रही कि टिकट मिलेगा या नहीं। वे तो बस झरखंड राज्य में व्याप्त दुरावस्था, गरीबी और बेरोजगारी से लड़ने के लिए खुद को राजद का एक सिपाही मानते हैं। उनके अनुसार लालू प्रसाद सामाजिक न्याय के पुरोधा हैं और उनके ही नेतृत्व में झारखंडवासी भी खुशहाल हो सकते हैं।

श्री महतो की पार्टी में वापसी के साथ ही झारखंड राज्य में राजद को और मजबूत बनाने की मुहिम शुरू हो गई। प्रधान महासचिव रामकृपाल यादव ने सदस्यता फार्म भरकर श्री महतो को पार्टी का प्राथमिक सदस्य बनाया। इस अवसर पर पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद खां ने कहा कि श्री महतो राजद के संस्थापक सदस्य रहे हैं और उनकी वापसी से झरखंड में पार्टी को काफी ताकत मिली है। ये 40 वर्षो से मजदूरों के सवालों पर लड़ते रहे हैं। अगले विधान सभा चुनाव में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि श्री महतो के साथ भुवनेश्वर पटेल ने भी राजद की सदस्यता ग्रहण की।

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  • Web Title:इस बार ‘समर्पण’ की भावना से ‘घर’ लौटे अकलू