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23 फरवरी, 2020|5:03|IST

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खतरे से खाली नहीं है, मानसिक बीमारी को हल्के से लेना

तेज रफ्तार से चल रही दुनिया में मानसिक समस्या आम होकर रह गई है। आम तौर पर लोग इसको हल्के से लेते हैं लेकिन  सर गंगा राम अस्पताल दिल्ली  की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डा. अनीता महाजन इसके खिलाफ हैं उनका कहना है शुरू में की गई हीलाहवाली बाद में  गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेती है। इलाज में भी इसके बाद काफी समय लग जाता है। 

नैनीताल में एक शिविर में भाग लेने आई डा. महाजन का कहना है कि हमारे यहां संयुक्त परिवार का चलन काउंसिलिंग केंद्र के रूप में सहायक होता था। पाश्चात्य सभ्यता की अंधी दौड़ में हम एकल परिवार की और भाग रहे है। यह स्थिति बिखराव व मानसिक अवसाद को पैदा कर रही है।

मानसिक बीमारी के दो पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डा.महाजन ने बताया कि पहले स्टेज को न्यूरोसिस व दूसरे को साइकोसिस कहा जाता है। पहली स्थिति में  मरीज के जल्दी ठीक होने की संभावना रहती है। क्योंकि ऐसा मरीज अधिक अवसाद से ग्रस्त नहीं होता लेकिन साइकोसिस की स्थिति में व्यक्ति एक अलग ही दुनिया में चला जाता है। आम तौर पर मस्तिष्क में सेरेटोनिन, डोयोमिन व नोरएफीनेफेरन जैसे  केमिकल्स होते हैं। इनके डिस ऑडर होने पर मानसिक स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता है।

इसको संतुलित स्थिति में लाने के लिए विशेषज्ञ दवाओं का इस्तेमाल कराते हैं। डा.महाजन के अनुसार तथाकथित झाड़ फूंक को रोका नहीं जा सकता है लेकिन मनोचिकित्सा ने आज ऐसी उन्नति की है कि इलाज कराने वाले को शतप्रतिशत लाभ मिलता है। इसके लिए आम जन में जागरूकता लाने की जरूरत है।

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  • Web Title:मानसिक बीमारी को हल्के से न ले