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भाजपा चिंतन बैठक में यशवंत-शौरी को न्यौता नहीं

भाजपा चिंतन बैठक में यशवंत-शौरी को न्यौता नहीं

भारतीय जनता पार्टी की 19 अगस्त से शिमला में होनेवाली चिंतन बैठक में लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार और उसके भविष्य के बारे में विस्तार से समीक्षा की जाएगी। इसमें वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी को न्यौता नही भेजा गया है, जिन्होंने चुनावी हार की जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस बैठक में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली लोकसभा में उपनेता सुषमा स्वराज भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, बिहार के उपमुख्यमंत्री राष्ट्रीय महासचिवों समेत दो दर्जन नेता हिस्सा लेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या सिन्हा और शौरी भी चिंतन बैठक में हिस्सा नही लेंगे सूत्रों ने बताया कि चिंतन बैठक के लिऐ न्यौता भेजने के लिए नेताओं का जो वर्गीकरण किया गया है, उसके दायरे में ये नेता नही आते हैं।

सूत्रों के अनुसार पार्टी चुनाव में हार की निराशा से उबर चुकी है, लेकिन भविष्य में इसकी पुनरावृति न हो यह अभी भी चिंतन मनन का बड़ा सबब बना हुआ हैं। पार्टी का मानना है कि बेहतर प्रदर्शन के लिए हार के कारणों को ढूंढना और उसका निदान करना जरूरी है। चिंतन बैठक का मुख्य एजेंडा यही रहने के संकेत हैं।

सूत्रों ने बताया कि अगला लक्ष्य यह तय करने का है कि पार्टी का भविष्य का रास्ता क्या हो। शिमला में होने वाली चिंतन बैठक में हार के कारणों पर विश्लेषण किया जाएगा, लेकिन इससे अधिक ध्यान इस बात पर होगा कि पार्टी के लिए आगे की दिशा क्या हो। सूत्रों ने कहा कि 1951 में जनसंघ के बनने और 2009 में आम चुनाव के बाद देश की राजनीति में भाजपा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वह योगदान यह है कि भाजपा ने भारत की एकदलीय राजनीति को द्विदलीय राजनीति में बदल दिया।

सूत्रों के अनुसार पिछले लोकसभा चुनाव में केवल कांग्रेस और भाजपा ही ऐसी दो पार्टियां रही, जिन्होंने तीन अंकों में सीटें हासिल की। उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले कई छोटी-छोटी राजनीतिक पार्टियां थी, जिनकी अपनी आकांक्षाएं एवं महत्वाकांक्षाएं थी, लेकिन पूरे देश में इस तरह की आम भावना थी कि छोटी पार्टियों को राजनीति में हावी होने नहीं दिया जाए।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के सामने इस समय आनेवाले विधानसभा चुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वैसे भी लोकसभा चुनाव बहुत दूर हैं। जहां तक केंद्र में नेतृत्व का प्रश्न है, जब तक वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी राजनीति में सक्रिय हैं उनके मार्ग निर्देशन में ही पार्टी आगे बढ़ेगी।

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