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क्या सांसदों के हंगामे का लाइव शो बंद होगा?

क्या सांसदों के हंगामे का लाइव शो बंद होगा?

लोकसभा में सांसदों के शोर शराबे और हुड़दंग का देश की जनता के लिए लाइव प्रसारण होना चाहिए या नहीं? लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार लोकसभा में सांसदों के हुड़दंग या हंगामे को जनता की नजरों से दूर रखने के पक्ष में हैं और इस संबंध में जल्दी ही कोई फैसला होने वाला है।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, मीरा कुमार ने इच्छा जताई है कि लोकसभा टीवी सदन में उन घटनाओं का प्रसारण न करे जब संसद सदस्य किसी मुद्दे पर  विरोध प्रकट करते हुए या नारे लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष के आसन (वेल) के निकट आ जाएं। ऐसे मौकों पर लोकसभा टीवी प्रसारण बंद कर दिया जाए। यह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के उस फैसले के ठीक उलट होगा जिसमें  उन्होंने लोकसभा में किसी भी तरह की घटना या हंगामे के लाइव प्रसारण की जबरदस्त वकालत की थी।

इस बारे में पूछे जने पर लोकसभा टीवी के सीईओ सुनीत टंडन ने ‘हिन्दुस्तान’ से कहा कि वह इस मसले पर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे। चटर्जी के कार्यकाल में शुरू हुए लोकसभा टीवी  के लाइव प्रसारण के सिलसिले में उन्होंने यह नियम बनाया था कि लोकसभा के अंदर हो रही किसी भी कार्यवाही को जनता जनार्दन से छुपाने की जरूरत नहीं है।

इसके बाद 2005 में लोकसभा टीवी के दिशानिर्देशों में इसे शामिल कर लिया गया। इस चैनल के पास लोकसभा के अंदर हो रही कार्यवाही के प्रसारण का एकाधिकार है जिसके फुटेज यह विभिन्न चैनलों को मुफ्त में उपलब्ध कराता है।

कोलकाता के एक कार्यक्रम में सोमनाथ चटर्जी ने अपने उस फैसले को इस आधार पर सही ठहराते हुए कहा था, ‘मुङो लगता है कि जनता को यह जनने का अधिकार है कि उनके प्रतिनिधि लोकसभा में कैसा आचरण करते हैं और उनके मुद्दों के प्रति कितने गंभीर हैं।’

इस पर टिप्पणी करते हुए लोकसभा टीवी को अपनी सेवाएं दे चुके एक अधिकारी ने कहा, ‘इस मामले का एक पक्ष वह है जो सोमनाथ चटर्जी की दलील रही है। दूसरा पक्ष यह भी है कि अपनी अजीबोगरीब हरकतों के सीधे प्रसारण से कुछ सांसद उत्साहित होकर यह सब करने के लिए प्रेरित भी होते हैं।’

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