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‘ओबामा’ वोल्गा किनारे वाला

अब बारी रूसी ओबामा की है। अमेरिकियों ने तो अपना नस्लवादी नकाब बराक ओबामा को राष्ट्रपति बना कर दुनिया के सामने उतार दिया है। अब बारी दुनिया की दूसरी बड़ी ताकत रूस की है। वैसे तो सोवियत रूस के बिखरने के पहले से वहां बड़ी संख्या में अफ्रीकी रहते आये हैं। ये अफ्रीकी यहां शिक्षा विनिमय कार्यक्रम के तहत यहां आते रहे हैं और अपने देश में काम के अवसर न होने के चलते यहां बसते रहे हैं। लेकिन रूसियों ने इन्हें कभी अपना नहीं समझा। मेट्रो और मार्केट में इन पर फब्तियां कसा जाना वहां आम है। हमले भी इन पर होते रहे हैं। बीते दिनों शिक्षा विनिमय कार्यक्रम के तहत अमेरिका से आये एक ब्लैक छात्र पर चाकुओं से हमला किया गया था। इसे नस्लवादी हमला माना गया था। ऐसे माहौल में भी एक अश्वेत ने यहां चुनाव लड़ने की ठानी है। इस ब्लैक अफ्रीकी का नाम जोक्विम क्रीमा है। क्रीमा सोवियत संघ के जमाने में 1989 में अफ्रीकी देश गिनी बिसाऊ से शिक्षा ग्रहण करने आये थे। मोल्डोवा युनिवर्सिटी से होते हुए अंतिम पढ़ाई क्रीमा ने वोलाग्रैड युनिवर्सिटी में की। पढ़ाई पूरी करने के बाद क्रीमा मास्को में ही रुक गये और यहीं की नागरिकता ले ली। अभी भी उनके पासपोर्ट के अनुसार वे यही दस साल और रुक सकते हैं। फिलहाल वे दक्षिण रूस के श्रेनाया अक्तूबा शहर में रहते हैं। यह शहर वोल्गा नदी के किनारे है और काफी पिछड़ा हुआ है। इसकी आबादी लगभग पचपन हजार है और पिछड़ा इतना है कि बरसात में यहां की सड़कों और गलियों में कीचड़ भर जाता है। इस शहर के स्थानीय निकाय के चुनावों में क्रीमा मेयर का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव फिलहाल अक्टूबर में होने हैं लेकिन क्रीमा ने उसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। इस शहर में ही उनका ससुराल है और वे धुआंधार रूसी बोलते हैं। पढ़ाई के दौरान ही क्रीमा की आरमेनियन मूल की एक रूसी लड़की अनैत से मोहब्बत हो गई थी। बाद में उससे शादी कर वे अपनी ससुराल में रहने श्रेनाया अक्तूबा आ गये थे। पहले तो शहर के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया फिर धीरे-धीरे वे शहर के लोगों के बीच रच-बस गये। अब वह अकेले घूमते हैं और उन्हें किसी भी नस्ली हमले का कोई डर नहीं सताता है। सड़क पर वे सफेद बुर्राक शर्ट और टाई पहन कर निकलते हैं। अब उन्हें लोग वोलोग्राड का ओबामा कह कर पुकारते हैं। उनके नौ साल का एक बेटा भी है। वे तरबूज पैदा करते हैं। उनके पास बीस हेक्टेयर जमीन है। उनके फार्म में बीस लोग काम करते हैं और मियां-बीवी दोनों वोल्गा नदी के किनारे तरबूज बेचते हैं। लंबे समय से यहां रहने के कारण अब लोग उनको उनके लोकल नाम वासिले लिवानोविच नाम से पुकारते हैं। वे यूनाइटेड रूसी पार्टी के सदस्य हैं और पुतिन के बड़े प्रशंसक हैं। लेकिन श्रेनाया अक्तूबा के स्थानीय चुनाव के लिये पार्टी ने उन्हें मेयर का टिकट देने से इनकार कर दिया है। लेकिन वे फिर भी चुनाव लड़ने पर अड़े हैं। वे निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद गये हैं। उन्होंने शहर में तमाम होर्डिग्स लगवाए हैं। उन पर लिखा है आपके शहर का नया मेयर-वासिले क्रीमा। वे अपने मतदाताओं को शहर को भ्रष्ट अधिकारियों से मुक्त कराने और उसके विकास का वायदा कर रहे हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनके इस दावे के बाद कि मैं अब रूसी हूं, उन्हें कोई गंभीर उम्मीदवार नहीं मान रहा है। यहां तक कि उनके चुनाव मैनेजर को भी क्रीमा के जीतने की उम्मीद नहीं है। मतलब साफ है कि अभी रूसी ओबामा को श्रेनाया अक्तूबा का मेयर बनने के लिये और इंतजार करना पड़ेगा और यदि वह जीत गए तो वह रूस के पहले ब्लैक आदमी होंगे, जो वहां की किसी प्रतिनिधि संस्था में चुन कर पहुंचेंगे।

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