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नाव पर खुलेंगे अस्पताल

 अब नाव पर खुलेंगे अस्पताल। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में नाव पर ही दवाएं लेकर डाक्टर मरीजों के पास पहुंचेंगे और इलाज करेंगे। पानी से घिरे बाढ़ पीड़ितों द्वारा गांव नहीं छोड़ने की जिद्द को देखते हुए स्वास्थ्य प्रशासन ने ही उन तक पहुंचने का निर्णय किया है।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को इस बाबत कार्रवाई का निर्देश दिया है। विभाग ने कहा है कि जलजमाव से घिरे उन क्षेत्रों में पीड़ित मरीजों को आवश्यक सभी चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करायी जाए।

नौका पर दवा और जरूरी स्वास्थ्य उपकरण लेकर डाक्टर दौरा करें। डाक्टरों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी सिविल सर्जनों की है। दवा की कमी की सूचना मिलते ही पीड़ित क्षेत्र के नजदीक के अस्पताल से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

विभाग का अनुमान है कि बाढ़ प्रभावितों की करीब 10 फीसदी आबादी को इलाज की जरुरत पड़ेगी। ऐसे में उन क्षेत्रों में पदस्थापित डाक्टर बिना डीएम की अनुशंसा के छुट्टी पर नही जाएंगे। बाढ़ की अवधि तक डीएम और सिविल सर्जन के अधीन अलग-अलग मॉनिटरिंग सेल काम करेंगे। 24 घंटे काम करने वाले इन सेलों में मरीजों, दवा और उपकरण की सूचनाएं अद्यतन रहेंगी।

स्वास्थ्य प्रशासन के सभी क्षेत्रीय पदाधिकारी क्षेत्रीय उप निदेशक, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा करेंगे। विभाग ने यह निर्देश भी दिया है कि बीमारियों के बारे में पूरी जानकारी प्रतिदिन स्वास्थ्य निदेशालय और राज्य स्वास्थ्य समिति को दिया जाए।

निदेशालय स्तर पर बाढ़ कोषांग गठित है जो निदेशक प्रमुख के अधीन काम कर रहा है। इस सेल की जिम्मेवारी है कि सभी सूचनाएं प्रदेश के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन विभाग का मिलेगी।

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