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नदारद हुए तो नपना तय, होगी अनुशासनिक कार्रवाई

बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। सरकार ने डाक्टरों को छुट्टी देने का अधिकार अस्थायी रूप से सिविल सर्जन से छीन लिया है। अब विशेष परिस्थिति में ही डीएम की अनुमति लेकर डाक्टर या स्वास्थ्यकर्मी छुट्टी पर जा सकेंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि बाढ़ के समय कोई भी डाक्टर या स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित पाये जाएंगे तो उनपर कार्रवाई होगी। अनुपस्थिति को गंभीर कदाचार माना जाएगा। बाढ़ की पूरी अवधि तक डीएम और सिविल सर्जन के अधीन अलग-अलग मॉनिटरिंग सेल काम करेंगे।

24 घंटे काम करने वाले इन सेलों में मरीजों, दवा और उपकरण की सूचनाएं अद्यतन रहेंगी। स्वास्थ्य प्रशासन के सभी क्षेत्रीय पदाधिकारी क्षेत्रीय उप निदेशक, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा करेंगे।

विभाग ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में नाव पर ही दवाएं लेकर डाक्टर को मरीजों के पास पहुंचने का फरमान जारी किया है। जलजमाव से घिरे उन क्षेत्रों में पीड़ित मरीजों को आवश्यक सभी चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। नौका पर दवा और जरूरी स्वास्थ्य उपकरण लेकर डाक्टर दौरा करेंगे। डाक्टरों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी सिविल सर्जनों की दी गई है।

दवा की कमी की सूचना मिलते ही पीड़ित क्षेत्र के नजदीक के अस्पताल से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। अनुमान है कि बाढ़ प्रभावितों की करीब 10 फीसदी आबादी को इलाज की जरुरत पड़ेगी।

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  • Web Title:डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टी रद्द