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प्रदेश के हजारों गांवों को अंधेरे में लालटेन का सहारा

उत्तरांखड के हजारो गांवो के लिए अभी भी रात के अंधेरे में लालटेन ही एक मात्र सहारा है। ऊर्जा प्रदेश कहलाने वाले राज्य के 1220 गांवों की महिलाओं ने अंधेरे से हो रही परेशानियों से निजात पाने के लिए संघर्ष करने का फैसला किया है। इसके लिए वे दो अक्टूबर से यहां अनशन शुरु करेगी। यह आन्दोलन रुरल लिटिगेशन एन्ड एन्टाइटलमेन्ट केन्द्र रुलक देहरादून के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

केन्द्र के अध्यक्ष कौशल किशेर ने बताया कि राज्य के अधिकाशं जिलो के दूर- दूराज के गांवो दोणी सटटा मसरी टाटी भीतरी पुजेरी देवल सेवा आदि में आजादी के छह दशक बाद भी बिजली नहीं पहुंची है। दूसरों को बिजली दे रहे राज्य के अपने गांव रात के अंधेरे में लालटेन की रौशनी में जिन्दगी काट रहे हैं। इसका सर्वाधिक प्रभाव महिलाओ पर पडता है।अब वे अपनी परेशानी से निजात पाने के लिए अनशन शुरु करेगी।

गंगा पर बहुउदेशीय बांधो का निर्माण करके पेयजल सिंचाई और बिजली उत्पादन की जरुरत बताते हुए कहा  कौशल ने कि राजनीतिक दल सिर्फ वोटों की राजनीति करती हैं।

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