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बालिका वधु: बना रहा और बढ़ता रहा

बालिका वधु: बना रहा और बढ़ता रहा

"बालिका वधु"एक ऐसा सीरियल है, जिसने शुरू से लेकर अब तक दर्शकों के दिल में अपने लिए चाव बना कर रखा। इसकी टीआरपी या तो स्थिर रही या फिर बढ़ी। इस कार्यक्रम में समाज की बुराइयों को कई रूपों में दिखाया है, जैसे लोगों का अनपढ़ होने के कारण यह मानना कि लड़कियों को पढ़ाई की आवश्यकता नहीं है, उन्हें छोटी उम्र में ही घर-गृहस्थी में व्यस्त हो जाना चाहिए। लड़की विधवा हो जाए तो दूसरी शादी नहीं कर सकती। यह सीरियल अपनी अलग और रिफ्रे¨शग कहानी के साथ दर्शकों के दिलों में पनपा और टीआरपी की बुलंदियों को छूता रहा। इसी शो ने कलर्स को मात्र 9 महीनों में टॉप पर पहुंचाया। ऐसा पहली बार हुआ था कि स्टार प्लस टीआरपी चार्ट में किसी चैनल से नीचे आया हो। कलर्स की प्रोग्रामिंग हैड अश्विनी यार्दी का कहना है कि "बालिका वधू" की न रुकने वाली सफलता इस बात का संकेत है कि भारतीय दर्शक हमेशा नए, फ्रैश और अलग कार्यक्रमों का स्वागत करते हैं और उन्हें पसंद करते हैं। इस बीच शो की टीवीआर लगातार 5 से 7 के बीच रही। टैम रेटिंग के अनुसार फरवरी 2009 के आखिरी सप्ताह में "बालिका वधू" की आज तक की सबसे ज्यादा टीवीआर 7.4 रही।  पर 21 जुलाई 2009 जिस दिन बालिका वधू को एक वर्ष पूरा हुआ, उस दिन इसकी टीवीआर 4.13 रही।

सफलता के साथ इस शो को तमाम आलोचनाओं को भी झेलना पड़ा। आलोचकों का कहना है कि यह शो बच्चों के दिमाग में बाल विवाह की सोच ला रहा है और बाल विवाह को बढ़ावा दे रहा है, पर इस पर अश्विनी यार्दी का यह कहना है कि मुझे नहीं लगता कि आलोचकों ने इस बात पर ध्यान दिया है कि हम हमेशा एक संदेश देते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत और समाप्त होने के बाद हम यह बताते हैं कि यह कार्यक्रम एक प्रयास है समाज की कुप्रथाओं को जड़ से हटाने का।
 
दिग्गज मानते हैं "बालिका वधू" की सफलता का राज यह है कि इसका फॉर्मेट एकदम नया था। आठ वर्षो से टीवी पर जो फॉर्मेट चल रहा है, उससे बिल्कुल अलग फॉर्मेट के साथ आया था यह कार्यक्रम। इसके अभिनेता युवा थे। इसके किरदारों को अच्छे से लिखा गया था और स्क्रिप्ट बहुत अच्छे से तैयार की गई थी। इसका टाइटल भी दर्शकों के दिलों को छूने वाला था। "बालिका वधू" एक शो की तरह अच्छी प्रोडक्शन और अच्छी स्टोरी टैलिंग की वजह से कामयाब हुआ है। इस बारे में शो की स्टार अविका गौड़ का कहना है कि इस कार्यक्रम में काम करते हुए मुझे समाज की कुप्रथाओं के बारे में बहुत जानकारी हुई है, जो मुझे किताबों से नहीं हुई थी। राजा राम मोहन रॉय के प्रयास पर मुझे अब समझ आया है कि वो क्या करना चाहते थे।

 

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