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वायु सेना में शामिल होने के बेहद करीब ‘ब्रह्मोस’

वायु सेना में शामिल होने के बेहद करीब ‘ब्रह्मोस’

भारत और रूस के वैज्ञानिक ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के हवाई संस्करण के अंतिम परीक्षण के करीब हैं। रूस के एक शीर्ष रक्षा अधिकारी ने बताया कि हवा में तथा अत्यधिक ऊंचाई पर मिसाइल को छोड़ने के लिए एक नए प्रक्षेपण इंजन का विकास हो चुका है।

रशियन मशीन बिल्डिंग रिसर्च एंड प्रोडक्शन सेंटर के निदेशक एलेक्जेंडर लीयोनोव ने कहा कि हम परीक्षण प्रक्षेपणों के लिए तैयार हैं। इतरतास समाचार एजेंसी ने लीयोनोव के हवाले से कहा कि मिसाइल का प्रारंभिक परीक्षण सुखोई-30 एमकेआई से किया जाएगा, लेकिन उन्होंने इसके लिए किसी तारीख का जिक्र नहीं किया।

ब्रह्मोस का हवाई संस्करण मिल जाने के बाद भारतीय वायु सेना पूरे एशिया में इस तरह की क्षमता रखने वाली एकमात्र वायु सेना होगी । ब्रह्मोस मिसाइल के जहाज से तट तथा जमीन से जमीन पर मार करने वाले संस्करणों को पहले ही भारतीय नौ सेना तथा सेना में शामिल किया जा चुका है।

लीयोनोव ने पहली बार यह खुलासा किया कि भारत और रूस ब्रह्मोस के पनडुब्बी से छोड़े जाने वाले संस्करण के डिजाइन तथा परीक्षण के भी बेहद करीब हैं। भारत की स्वदेशी परमाणु चालित पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत जिसे अंतिम परीक्षणों के लिए समुद्र में उतारा जा चुका है से भारत में निर्मित के-15 परमाणु मिसाइल को दागा जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पनडुब्बी के संवर्द्धित संस्करण में ब्रहमोस क्रूज मिसाइल को दागने की क्षमता होगी।

लीयोनोव ने हालांकि सीधे टिप्पणी नहीं की लेकिन रूसी सूत्रों का कहना है कि इस दिसंबर में भारत को पट्टे पर दी जा रही अकुला द्वितीय श्रेणी की नेरपा परमाणु पनडुब्बी में पानी के भीतर ब्रह्मोस को दागने की क्षमता है।

 

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