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नहीं डरा पाई `अज्ञात'

नहीं डरा पाई `अज्ञात'

सितारे : प्रियंका कोठारी, गौतम रोडे, नितिन रेड्डी, रसिका दुग्गल, इश्तियाक खान, इशरत अली, रवि काले, हार्वड रोजमेयर, काली प्रसाद मुखर्जी और जॉय फर्नाडिस

निर्माता/बैनर : राम गोपाल वर्मा और रॉनी स्क्रूवाला / यूटीवी मोशन पिक्चर्स
निर्देशक : राम गोपाल वर्मा
लेखक : नीलेश गिरकर और पुनीत गांधी 
गीत : प्रशांत पांडे, संदीप सिंह और सरीम मोमिन
संगीत : इमरान, बापी और तुतुल
बैकराउंड संगीत : अमर मोहले

कहानी :   एक फिल्म की शूटिंग के लिए निर्माता मूर्ति (इशरत अली) अपने निर्देशक जेजे (हार्वड रोजमेयर) के साथ जंगलों में शूटिंग के लिए निकला है। फिल्म का हीरो शरमन (गौतम रोडे) और हीरोइन आशा (प्रियंका कोठारी) के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर सूजल (नितिन रेड्डी), समीरा (रसिका दुग्गल), लक्ष्मण (इश्तियाक खान) और शक्की (काली प्रसाद मुखर्जी) भी हैं। इस टीम को जंगल में गाइड करता है सेतू (जॉय फर्नाडिस) । एक दिन शूटिंग के दौरान कैमरा खराब हो जता है।
 
सभी लोग जंगल में कैंपिंग के लिए जते हैं। उसी रात जब सेतू कुछ रहस्यमयी आवाजों का पीछा करने जता है तो गायब हो जता है। सुबह सेतू की लाश मिलती है। एक अनजान शक्ति टीम के सभी सदस्यों को बेरहमी से मार डालती है।
 
निर्देशन : राम गोपाल वर्मा को हॉरर, सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों से बेहद लगाव है, लेकिन उनका यह लगाव हर बार तुरुप का पत्ता साबित नहीं होता। इस फिल्म में निर्देशन उनके हाथ से फिसल गया है। कितना फिसला है ये जनने के लिए उन्होंने इस फिल्म के दूसरे भाग को देखने के लिए दर्शकों को मजबूर कर दिया है।
 
एक अनजन बेरहम हत्यारे को उन्होंने फिल्म में स्पेशल इफेक्ट्स, ध्वनि, कैमरा कंट्रोल और कलाकारों के चेहरों पर भय दिखाने के साथ प्रकट किया है। रामू के निर्देशन में इस बार ‘भूत’ जसा डर नहीं है। हां, प्रियंका कोठारी के ग्लैमर पक्ष को उभारने में उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी है। कई दृश्यों में फिल्म को ‘प्रीडेटर’ और ‘रॉन्ग टर्न 2’ जसा दिखाने की कोशिश की गयी है। उनका अनजन हत्यारा कभी ‘ट्रीमर्स’ लगता है तो कभी ‘एनाकोंडा’। रहस्य और रोमांच का आलम यह है कि लोग फिल्म का अंत देख कर खुद को ठगा महसूस करेंगे।
 
अभिनय: एक अज्ञातखूनी के डर को किरदारों के चेहरे पर इस तरह से दिखाया जएगा, ऐसी उम्मीद रामू जी से नहीं थी। फिल्म के सितारों में अभिनय का तालमेल दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता। प्रियंका कोठारी मुसीबत के समय में भी ग्लैमर दिखाने में बाज नहीं आयीं। गौतम रोडे और रवि काले ने इरिटेट किया है। 
 
गीत-संगीत : कई जगहों पर अमर मोहले का बैकराउंड संगीत काफी अच्छा है। वसे भी राम गोपाल वर्मा की हॉरर फिल्मों में गीत-संगीत की गुंजइश कम ही रहती है।
 
क्या है खास : फिल्म में कई शॉकिंग सीन्स है, जो अच्छे हैं। भयानक जंगल की लोकेशंस और सिनेमैटोग्राफी अच्छी है।
 
क्या है बकवास: किसी अनजने डर से ऐसे बचकाने तरीके से बचने की कोशिश की जएगी, सोचा न था। फिल्म में लगता है कि कोई भी पात्र बचना चाहता ही नहीं। निर्देशक ने उन्हें किसी अज्ञात के हाथों इतना बेबस दिखा दिया है कि फिल्म में रोमांच ही नहीं दिखता।
 

पंचलाइन: रामू की आधी-अधूरी सी एक अज्ञात डरावनी फिल्म, जिसे शायद ही कोई याद रखना चाहे।  

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