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कार्ड से बचाकर रखें क्रेडिट

आजकल पैसा नहीं, प्लास्टिक मनी यानी क्रेडिट कार्ड का जमाना है। जिसे देखो वही इसके पीछे भाग रहा है और क्रेडिट कार्ड वाले सब के पीछे भाग रहे हैं। लेकिन सावधान, अब क्रेडिट कार्ड कंपनियों ने बकाया वसूली के लिए ऐसे हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं जो चोरी-चोरी, चुपके-चुपके एक तरह से आपकी ‘जेब’ काट सकते हैं। कैसे, बता रहे हैं विनय कुमार मिश्र

क्रेडिट कार्ड के बिलों की जबरिया वसूली पर रिजर्व बैंक ने लगाम कस दी है। लेकिन क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियां और बैंक भी कम नहीं हैं। इन लोगों ने नए-नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। इस मामले में पहल की है आईसीआईसीआई बैंक ने। बैंक ने क्रेडिट कार्ड लेने वालों पर एक शर्त और थोप दी है। इसके अनुसार कार्ड लेने वाला अगर नौकरी करता है तो उसको नौकरी देने वाले की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी के वेतन से काट कर क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान करे। हालांकि अभी यह साफ नहीं कि अगर बिल को लेकर कोई विवाद है तब भी बिल की यह नई जबरिया वसूली की व्यवस्था लागू रहेगी। आईसीआईसीआई ने यह व्यवस्था 23 जुलाई से लागू कर दी है। देश में क्रेडिट कार्ड हरदम विवाद का मुद्दा रहा है। कभी इसके गलत इस्तेमाल को लेकर तो कभी गलत बिलों को लेकर। बाद में क्रेडिट कंपनियों की जबरिया बिलों की वसूली मुद्दा बना। एक समय तो ऐसा था जब थोड़े बिल के वकाए पर ही घर पर गुंडों के पहुंचने की बातें सामने आने लगीं। इस बात पर रिजर्व बैंक ने सख्ती की। रिजर्व बैंक ने क्रेडिट कार्ड कंपनियों को हिदायत दी कि बिल की वसूली के लिए कानूनी रास्ता अपनाया जाए। क्योंकि कानूनी रास्ते में चलते हुए थोड़ा समय लगता था और कई ऐसे सवालों का सामना करना पड़ता था जो यह कंपनियां करने से बचती थीं। इसमें ब्याज लगाने के तरीका से लेकर ग्राहक को पूरी जानकारी देने तक का मामला है।


आखिर दिक्कत क्यों आती है

नियम है कि क्रेडिट कार्ड जारी करने के पहले लेने वाली की वित्तीय हालात का पूरा जायजा लिया जाना चाहिए। इसके अलावा कार्ड जारी करने से पहले कार्ड की पूरी शर्त बतानी चाहिए। यह बातें नियमत: हैं लेकिन इनको पूरा नहीं किया जाता। क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियां अपने एजेंटों पर ज्यादा से ज्यादा कार्ड जारी करने का दबाव डालती हैं। इसके बाद धड़ाधड़ कार्ड जारी करने का सिलसिला शुरू होता है। एजेंट सिर्फ वही बताते हैं जो ग्राहक को सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन बाद में उन अच्छी बातों का सच सामने आता है।

कई बार फ्री कार्ड के बदले बिल आ जाता है तो कई बार बिल मांगने के बाद भी सिर्फ यही बताया जाता है कि बकाया कितना है। ऐसे में ग्राहक बिल देने से बचता है और चाहता है कि उसका बिल सही किया जाए। दूसरी तरफ क्रेडिट कार्ड कंपनियां ग्राहक की बात सुने बिना बिल पर बिल जारी करती जाती हैं।

कितने हैं कार्ड और कितना बकाया

देश में 31 मई तक करीब 48.42 मिलियन क्रेडिट कार्ड काम कर रहे थे। जबकि इस दौरान डेबिट कार्ड की संख्या इससे काफी ज्यादा 283.58 मिलियन थी। लेकिन जहां तक बकाए की बात है उसमें क्रेडिट कार्ड काफी आगे है। क्रेडिट कार्डो पर कुल बकाया है 9748 करोड़ रुपए जबकि डेबिट कार्ड पर बकाया है केवल 3665 करोड़ रुपए। यानी डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ज्यादा संयमित होकर खर्च कर रहे हैं। क्योंकि इनकी संख्या करीब छह गुना ज्यादा है, लेकिन बकाए के मामले में करीब 33 फीसदी हैं।

एक लाख के लेनदेन में 120 रुपए का घपला

जी हां, देश में एक लाख रुपए के क्रेडिट कार्ड के लेनदेन पर करीब 120 रुपए का घपला होता है। इस प्रकार से फ्रॉड रेशो 0.12 फीसदी का है। कमोबेश यह रेशो लगातार इसी स्तर पर बना हुआ है। तमाम प्रयास के बाद भी इसमें कमी नहीं आ रही है। हालांकि जानकारों की अपनी अलग राय है। उनके अनुसार इसमें बढ़त न होना अच्छी बात मानी जा सकती है। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड के चोरी या खो जाने से यह नुकसान होता है। इन कार्ड के माध्यम से ऐसा सामान ज्यादा खरीदा जाता है जिसको तुरंत बेचा जा सके। इसके अलावा, इन कार्ड का असुरक्षित जगहों पर इस्तेमाल भी खतरे को दावत देना जैसा ही रहता है। इन जगहों में टूरिस्ट प्लेस ज्यादा आते हैं। आगरा, कोयम्बटूर, चैन्नई जैसी जगहों से शिकायतें ज्यादा मिल रही हैं। इन जगहों में कार्ड का छोटी दुकानों पर इस्तेमाल होता है। यहां से कार्ड का डाटा चोरी होने का खतरा बना रहता है। इससे क्लोन कार्ड तैयार किया जाता है जिसका बाद में गलत इस्तेमाल होता है।

कैसे बचें

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। सबसे जरूरी है कि जब कार्ड को मशीन में स्वैप किया जाए आपको सामने रहना चाहिए। कई बार कार्ड दो बार स्वप कर लिया जाता है। इसके अलावा, ऑनलाइन इस्तेमाल में ध्यान देना चाहिए। अगर खरीदारी करने वाली साइट सुरक्षित नहीं है तो उससे बचना चाहिए।

कार्ड के चोरी होने या खोने पर

ऐसा होते ही सबसे पहले क्रेडिट कार्ड कंपनी को जानकारी देते हुए कार्ड को ब्लॉक कराने की पहल करनी चाहिए। इसके लिए ज्यादातर कंपनियों की चौबीसों घंटे सेवा उपलब्ध रहती है। इसमें देर करना नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा, लिखित में यह जानकारी भी देनी चाहिए जिसकी रिसीविंग अपने पास रखनी चाहिए क्योंकि जनकारी मिलने के बाद अगर क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग होता है तो नुकसान आपको नहीं सहना पड़ेगा।

कैसे रखें साफ-सुथरा हिसाब

क्रेडिट कार्ड कंपनियां हर माह निश्चित तारीख को बिल जारी करती हैं। यह बिल चिट्ठी या मेल से भेज जाता है। कई बार शिकायत रहती है कि बिल समय पर नहीं मिला या गलत मिला। इसके चलते लोग बिल का भुगतान नहीं करते हैं। वैसे सबसे अच्छा तरीका है कि हर खरीदारी का तारीख के अनुसार ब्यौरा रखा जाए। इससे पता रहता है कि महीने में कितने का बिल हुआ है। ऐसे में अगर बिल नहीं मिला है तो उतने रुपए का भुगतान सीधे किया जा सकता है। गलत बिल की शिकायत पर न्यूनतम भुगतान करके अपने बिल को सही कराना ज्यादा सही रहता है अपेक्षाकृत बिल न देने के।

आकर्षक ऑफरों से बचें

क्रेडिट कार्ड कंपनियां बताती हैं कि डेढ़ से लेकर दो फीसदी तक ब्याज लेती हैं। लेकिन वास्तव में यह ब्याज दर प्रतिमाह की होती है। वार्षिक आधार पर 18 से लेकर 24 फीसदी तक बैठती है। इसी प्रकार शुरू में कहा जाता है कि कार्ड फ्री है। लोग कार्ड ले लेते हैं और बाद में बिल आ जाता है। शिकायत करने पर पता चलता है कि कुछ न्यूनतम खरीदारी की बाध्यता थी। इसी तरह ज्यादातर आकर्षक ऑफरों के पीछे कुछ न कुछ जरूर होता है। इसलिए जरूरत है उस छिपी जानकारी को खोजने की। किसी भी ऑफर का इस्तेमाल अपनी जरूरत के मुताबिक ही करें।

कैसे रद्द होता है कार्ड

क्रेडिट कार्ड रद्द कराने के लिए सबसे पहले बिल का पूरा भुगतान करना जरूरी होता है। ऐसा होने पर कंपनी को लिखित में या ई-मेल से जानकारी दें। इसके बाद क्रेडिट कार्ड कंपनी आपको लिखित में जानकारी देगी। इस जानकारी को संभाल कर रखना जरूरी होता है। साथ ही क्रेडिट कार्ड के टुकड़े कर देना चाहिए। ऐसा करने से इसके गलत इस्तेमाल की संभावना खत्म हो जाती है। लेकिन याद रखें कि क्रेडिट कार्ड खत्म करने की जानकारी देने वाले कागज कुछ दिन तक संभाल कर जरूर रखें। ताकि किसी भावी समस्या की सूरत में आप कार्ड के बारे में बता सकें कि वह पहले से ही रद्द हो
चुका है।

सुरक्षा के लिए जरूरी हुआ पिन

क्रेडिट और डेबिट कार्ड की सुरक्षा के लिए रिजर्व बैंक ने एक अगस्त से अतिरिक्त पिन नम्बर की शुरुआत की है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि सारी कंपनियां लोगों को अतिरिक्त पिन नम्बर उपलब्ध कराएं। ऐसा होने से कार्ड के गलत इस्तेमाल की संभावना काफी कम हो जएगी। यह पिन नम्बर नाम, कार्ड नम्बर, एक्सपाइरी डेट जैसे चीजों से अलग होंगे। यह पिन कार्डधारक अपनी-अपनी कंपनियों से ले सकेंगे।

पता भी नहीं चलेगा और ग्राहक का पैसा निकल जाएगा

आईसीआईसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड डिफॉल्टरों से बकाए की वसूली के लिए अब सीधे कार्डधारक की नियोक्ता कंपनी से संपर्क साधेगा और कार्डधारक की सेलरी से सीधे रकम की वसूली कर ली जाएगी। प्राइवेट सेक्टर के इस बैंक ने नियम और शर्तो में ये नया प्रावधान जोड़ा है। इसके मुताबिक कार्डधारक या कंपनी पर लागू कोई लॉ या कोई कांट्रेक्ट उसे इस तरह की कटौती से नहीं रोक सकेंगे। आईसीआईसीआई बैंक के प्रवक्ता का कहना था कि नया प्रावधान सिर्फ उन्हीं ग्राहकों पर लागू होगा, जो क्रेडिट कार्ड में डिफॉल्ट करते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि इस नए नियम से बैंक, क्रेडिट कार्ड धारी ग्राहक पर हावी हो जाएंगे, जिससे आम उपभोक्ता की दिक्कतें बढ़ जाएगी। पेमेंट को लेकर विवाद की स्थिति में बैंक सेलरी से रकम कटवा लेगा और बाद में विवाद को सुलझाने के लिए उपभोक्ता को परेशान होना पड़ेगा। सवाल ये है कि अगर किसी व्यक्ति को गलती से बिना खरीदारी किए बिल मिल गया, तो ऐसे में बैंक सीधे ही किसी की सेलेरी से पैसा कैसे काट सकता है? दूसरी सबसे बड़ी सवाल ये है कि क्या बैकों का ये मानना है कि सेलेरी वर्ग वाले व्यक्ति ही डिफॉल्टर ज्यादा होते हैं?

बड़ी खरीदारी के लिए चाहिए फोटो आईडी

अगर क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से बड़ी खरीदारी करने जा रहे हैं तो फोटो आईकार्ड रखना न भूलें। क्योंकि अब ऐसा करना जरूरी कर दिया गया है। अगर सात हजार रुपए से ज्यादा की ज्वैलरी खरीदनी हो, पांच हजार से ज्यादा का मोबाइल या आठ हजार रुपए से ज्यादा का इलेक्ट्रोनिक सामान खरीदना हो तो दुकानदार आपसे फोटो आईकार्ड दिखाने को कह सकता है।

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