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जीवनसाथी को भी भागीदार बनाएं

भारतीय समाज में बचत का खासा महत्व है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह देखा जाता है कि गृहस्थी की गाड़ी को चलाने के लिए कमाने और बचाने का जिम्मा पुरुषों के कंधे पर ही रहता है और अपनी इसी कमाने और बचाने की धुन में लगे पुरुष को यह फिक्र नहीं रहती कि वह फाइनेंशियल प्लानिंग में अपनी पत्नी को भी शामिल करे, जबकि परिवार में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दोनों लोगों को इसकी जानकारी होनी चाहिए।

कमाएं-बचाएं तो बताएं भी

पति सोचते हैं कि घर के झमेले इतने सारे हैं, पत्नी उनमें उलझी रहती है तो नाहक ही उसे रुपये-पैसे के झंझट में धकेलने से बचा जाए। ऐसा सोचना गलत है। माना कि आपकी जिम्मेदारी ज्यादा है लेकिन एक हिस्सा पत्नी भी निभा रही है। हो सकता है वह आपको कुछ प्रैक्टिकल सुझाव या निकट भविष्य में आने वाले खर्च इत्यादि की जानकारी दे जिससे आप अपनी प्लानिंग को सही दिशा दे सकें।

पारदर्शिता जरूर बरतें

यह मानकर न चलें कि आपका पार्टनर कोई जादूगर है और आप जो कर रहे हैं उसकी जानकारी उसे अपने आप हो जाएगी। कभी कोई भी अप्रिय स्थिति सामने आ सकती है। रुपये-पैसे के मामले में आप एक-दूसरे के लिए खुली किताब की तरह होने चाहिए। अपने जरूरी कागजात और उनके रिकार्ड करीने से फाइल करके रखने चाहिए। उन्हें किसी महफूज जगह पर रखना उचित रहेगा, लेकिन पार्टनर को उसकी लोकेशन बताना भी जरूरी है। कंप्यूटर के पासवर्ड, लॉग-इन की जानकारी जरूर पार्टनर को हो।

जरूरी जानकारी लिखकर रखें

बैंक में जमा पैसा, निवेश, मकान के कागजात, लोन, क्रेडिट कार्ड, बीमा कवर, उनकी मैच्योरिटी, इनवेस्टमेंट डिटेल्स, डीमैट अकाउंट नंबर, ब्रोकर का पता-नंबर, बैंक लॉकर का नंबर, बैंक खाते, उनकी ब्रांच इत्यादि की जानकारी लिखित में किसी सुरक्षित जगह पर रखें और पार्टनर को बताएं। सभी जरूरी कागजात, लेन-देन का हिसाब पार्टनर की जानकारी में होना चाहिए।

इमरजेंसी फंड जरूर रखें

आकस्मिक रूप से होने वाले खर्च के लिए इमरजेंसी फंड जरूर बनाना चाहिए। ऐसी स्थिति में परेशानी से परिवार को बचाने के लिए कुछ पैसा जरूर अलग से रखा जाए जिसकी जानकारी पार्टनर को हमेशा रहनी चाहिए।

भविष्य की करें प्लानिंग

यह जरूरी हो कि आप अपने और परिवार के भविष्य के लिए प्लानिंग करें। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, नौकरी-रोजगार, शादी और घर की जरूरतों के बारे में सोचना चाहिए, लेकिन अकेले नहीं। पत्नी से सलाह लें कि निकट भविष्य में क्या-क्या जरूरतें सिर उठाने वाली हैं और उसके लिए क्या तैयारी जरूरी है, इनकी प्राथमिकता सूची बनाई जा सकती है। जिन खर्चों को टाला जा सकता है। उन पर आपस में बैठ कर चर्चा करना ठीक रहेगा।

कर्ज का मर्ज मिल कर करें ठीक

ऐसा कई बार देखा गया है कि पुरुष परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज या क्रेडिट कार्ड के शिकंजे में फंसता चला जता है। यदि इस तरह की कोई समस्या हो तो दोनों बैठ कर विचार कर सकते हैं और कर्ज का भुगतान करने के लिए कुछ खर्चो में कटौती कर सकते हैं। या फिर किस कर्ज को पहले चुकाने से चार पैसे बच सकते हैं, इसका फैसला करें। घर के खर्च का हिसाब किताब तो पत्नी ही बेहतर जनती है। परिवार में किसकी जरूरत कब तक टाली जा सकती है, उससे बेहतर कौन जान सकता है।

बजट जरूर बनाएं

अपने घर का बजट जरूर बनाना चाहिए। जो कमाया उसे खर्च कर दिया वाली प्रवृत्ति आगे चलकर संकट पैदा कर सकती है। हर खर्च और जरूरत का हिसाब करना चाहिए। कितनी आय है और खर्च कितना है, उसका हिसाब करने के बाद कुछ रकम बचत के लिए भी तय करनी चाहिए और यह कार्य पार्टनर को विश्वास में लेकर ही किया जा सकता है।

पार्टनर को जिम्मेदारी सौंपें

घर का बजट हो या जरूरी कागजत को सहेज समेट कर रखने का काम हो अपने साथी की मदद जरूर लेनी चाहिए। इससे एक तो उसकी इन विषयों में रुचि बढ़ेगी तो दूसरे उसका ज्ञान बढ़ेगा। साथ ही उसे कागजातों का महत्व भी समझ में आएगा।

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