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बालों की देखभाल

कल आपने पढ़ा बालों के झड़ने संबंधी कुछ कारण। आज पढ़ें उनसे बचने के उपाय। कुछ दवाएं भी दोषी होती हैं। कुछ दवाएं जैसे गर्भनिरोधक गोलियां, एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं, ऐंटी-कुएगुलेंट (रक्तजमाव-रोधक) दवाएं, एंटीर्केसर (र्केसर-रोधी) औषधियां, गाउट में दी जानेवाली दवाएं और यहां तक कि उच्च मात्रा में विटामिन ‘ए’ लेने से सिर के बाल अचानक तेजी से झड़ने लग सकते हैं। ऐसे में दोषी दवा यथासंभव बंद कर या बदल कर स्थिति सुधारी जा सकती है।

बाल हार्मोनल विकार होने पर भी झड़ते हैं। अगर थायरॉइड ग्रंथि समुचित मात्रा में थायरॉक्सिन हार्मोन न बनाएं या जरूरत से ज्यादा उतावली हो उठे तो बाल झड़ने की गति बढ़ जाती है। इसका समाधान शरीर में थायरॉइड हार्मोन के स्तर को सामान्य बनाकर ही मुमकिन है।

बाल लंबी बीमारी या सर्जरी के बाद भी गिरते हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी बालों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है। किसी भी लंबी बीमारी या ऑपरेशन के दो-तीन महीने बाद बाल एक साथ तेजी से गिर सकते हैं। इस बाबत कुछ खास करने की जरूरत नहीं होती, चूंकि यह दौर चार-छह महीनों में खत्म हो जाता है। इसके बाद बाल फिर से पुरानी लय से बढ़ने लगते हैं।

प्रसूति के बाद भी झड़ते हैं बाल : गर्भवती स्त्रियों में शरीर में हुए हार्मोनल परिवर्तनों के कारण बालों के गिरने की सामान्य क्रिया थम जाती है। शिशुजन्म के तीन माह बाद जब यह क्रिया अपने रेले पर लौटती है तो लगता है कि जैसे बाल झड़ने बंद ही नहीं होंगे। यह स्वाभाविक क्रिया है, जिसके प्रति न तो विचलित होने, न ही कोई उपाय करने की आवश्यकता है। जल्द ही बाल अपने से ही अपने सामान्य चक्र में लौट जाते हैं।

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