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लखनऊ जेल तोड़ने पर रोक

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को उस वक्त तगड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट लखनऊ जेल को तोड़ने और उसके कैदी निर्माणाधीन जेल में शिफ्ट करने पर रोक लगा दी। राज्य सरकार सवा सौ साल से ज्यादा पुरानी इस जेल को तोड़कर इसकी जगह इको पार्क बनाना चाहती है। लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार यहां अंबेडकर पार्क बनाना चाहती है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केजी बालाकृष्णन और एसबी सिन्हा (शुक्रवार को रिटायर) की खंडपीठ ने कहा कि सरकार जेल के मामले में दो हफ्ते तक यथास्थिति बनाए रखे और उसमें न तो तोड़फोड़ करे। न ही कैदियों दूसरी जगह को शिफ्ट करे। कोर्ट ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि सरकार अर्धनिर्मित जेल में कैदियों को शिफ्ट करना चाहती है, क्या ऐसी जेल से कैदी भाग नहीं जाएंगे।

खंडपीठ ने यह आदेश संगम लाल पांडे की याचिका पर दिया। राज्य सरकार के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल, मायावती के करीबी सहयोगी वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश मिश्रा और अतिरिक्त एडवोकेट एसके द्विवेदी ने खंडपीठ से काफी आग्रह किया कि उन्हें कैदियों को शिफ्ट करने दिया जाए और पुरानी जेल पर यथास्थिति का आदेश न दिया जाए।

 

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