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शिक्षकों की नियुक्ति न होने से बच्चों का भविष्य अधर में

उत्तर प्रदेश के समय से शिक्षा विभाग में लागू हुए नियम ने नगर क्षेत्र की बुनियादी शिक्षा का ढांचा हिलाकर रख दिया है। नगर क्षेत्र के शिक्षकों की नियुक्ति न होने के प्रावधान की वजह से अधिकांश विद्यालय एकल व्यवस्था में तब्दील हो गए है। जब तक शासन की नींद टूटेगी, तब तक बेहतर शिक्षा से महरूम हो चुके हजारों-सैकड़ों बच्चे प्राथमिक विद्यालयों को अलविदा कह चुके होंगे।

शिक्षा महकमा हरिद्वार, रूड़की और मंगलौर को नगर क्षेत्र में मानता है। नगर क्षेत्र में कुल 76 प्राथमिक विद्यालय है। अगर देखा जाए तो मंगलौर में 13 प्राथमिक विद्यालय है लेकिन सब के सब एकल व्यवस्था में बदल चुके है। रूड़की में हालात ठीक नजर आते है, यहां 19 में से चार ही एकल है लेकिन हरिद्वार में 44 में से 15 विद्यालय एकल व्यवस्था के तहत चल रहे है।

विभागीय और निजी कार्यो से अक्सर एकल व्यवस्था वाले विद्यालयों में तैनात शिक्षक नहीं आ पाते है, तब विद्यालय में शिक्षण कार्य ठप्प रहता है। लेकिन दून और हरिद्वार में बैठे आला अफसरान भी इस व्यवस्था को सुधार नहीं सकते है। इसका भी प्रमुख कारण है।

उप्र के समय सन 86 में नगर क्षेत्र में शिक्षकों की नियुक्ति न करने का नियम बना। उत्तराखण्ड बनने के बाद जब दून में बैठे शिक्षा महकमे के अफसरान ने नगर क्षेत्र में शिक्षा की हालत देखी तो उन्होंने बीच का रास्ता निकाला। वर्ष 04 में प्रदेश सरकार ने एक साल के लिए शासनादेश जारी किया। शासनादेश में देहात क्षेत्र में तैनात 50 वर्ष से अधिक उम्र के शिक्षक, बेवा, तलाकशुदा, विकलांग या अस्वस्थ शिक्षकों को वरीयता देते हुए उनका तबादला कर नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के कोटे को पूरा किया।   

मगर अब हालात पूर्व जैसे ही हो गए है। विद्यालयों में तैनात किए गए शिक्षक रिटायर्ड हो चुके है या प्रोन्नति पाकर ट्रांसफर हो गए है। अब शिक्षा विभाग के हाथ बंधे हुए है। तब तक समस्या का समाधान नहीं हो सकता है, जब तक प्रदेश सरकार नया शासनादेश लागू नहीं करती।

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  • Web Title:पुराने नियम ने हिलाया नगर क्षेत्र में शिक्षा का ढांचा