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8 सितम्बर से कराया जाएगा 40 लाख महिलाओं को अक्षरबोध

राज्य की हर तीन में दो महिला निरक्षर है। यही वजह है कि देश में साक्षरता के मामले में बिहार निचले पायदान पर है। सूबे में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए राज्य सरकार का मानव संसाधन विकास विभाग 9 सितम्बर से पूरे राज्य में मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना की शुरुआत कर रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घोष मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने शुक्रवार को किया।

बीईपी के परियोजना निदेशक राजेश भूषण की मौजूदगी में सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रधान सचिव ने कहा कि अक्षर आंचल राज्य सरकार की अपनी योजना है। करीब 55 करोड़ की लागत से छह माह में राज्य की 40 लाख निरक्षर महिलाएं साक्षर बनेंगी। आगामी 9 अगस्त से राजधानी में साक्षरता अभियान से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षिण प्राप्त की रिसोर्स पर्सन (मुख्य साधनसेवी) अपने-अपने जिलों में अक्षरदूतों को प्रशिक्षण देना आरंभ करेंगे।

केआरपी 2 लाख अक्षरदूतों को 30 दिन के भीतर प्रशिक्षित करेंगे। उसके बाद 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन से महिलाओं को साक्षर बनाने का कार्य शुरू होगा। श्री सिंह ने बताया कि एक महिला को साक्षर बनाने में 120 रुपए खर्च होंगे। योजना की सफलता के लिए राज्य , जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। राज्य साक्षरता मिशन के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं।

महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए कहानी परम्परा का प्रयोग होगा। दो पाठय़ सामग्रियों के अलावा हर केन्द्र पर ट्रांजिस्टर दिया जाएगा। टीवी और रेडियो कार्यक्रम भी बनाए जाएंगे। शिक्षण कार्य में अक्षरदूतों के अलावा 9वीं कक्षा की छात्राओं का भी सहयोग लिया जाएगा। अक्षरदूतों को एक हजार की प्रोत्साहन राशि भी मानदेय के रूप में दी जाएंगी। अक्षर आंचल योजना की समीक्षा और सफल संचालन के लिए चार स्तरों पर थर्ड पार्टी इवेल्यूएशन कराया जाएगा।

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  • Web Title:9 अगस्त से सूबे में शुरू होगी अक्षर आंचल योजना