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कोयला संकट को ले केन्द्र को त्राहिमाम संदेश

कोयला संकट से जूझ रहे बिहार ने केन्द्र को त्राहिमाम संदेश भेजा है। कोयला की किल्लत के कारण जहां बरौनी और कांटी में उत्पादन प्रभावित हो रहा है वहीं पूवरेत्तर के तमाम बिजलीघरों का उत्पादन ही आधा हो गया है।

तालचर, कहलगांव और फरक्का बिजलीघरों में उत्पादन में भारी कमी हुई है और इसका सीधा असर बिहार पर पड़ रहा है। शुक्रवार को केन्द्रीय प्रक्षेत्र से बिहार का आवंटन 1553 मेगावाट होने के बावजूद मात्र 988 मेगावाट की आपूर्ति हुई।  ऊर्जा मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने भी स्वीकार किया कि कोयला संकट बड़ी समस्या बनती जा रही है और इसके लिए कारगर योजना बनानी होगी। उन्होंने कहा कि कोयले के कारण बिहार के बिजलीघरों को कई मुसीबतों का सामना कर पड़ रहा है। दूसरी ओर एनटीपीसी के बिजलीघरों से आपूर्ति भी कम हो गई है।

पिछले दिनों ऊर्जा विभाग ने केन्द्र से कोयला संकट पर तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए पत्र भी लिखा। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ-साथ कोयला मंत्रालय व कोल इंडिया लिमिटेड को भी पत्र लिखा गया। बिहार बिजली बोर्ड ने भी अपने स्तर से कोल इंडिया को पत्र लिखकर कोयला संकट के साथ-साथ पत्थर कोयला को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज की है।

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