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मांगा रुपया पर चवन्नी भी नहीं मिली

मांगा रुपया पर चवन्नी भी नहीं मिली। हाथ आया मात्र दस पइसा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूखे से निपटने के लिए केन्द्र से 300 मेगावाट बिजली की मांग की तो केन्द्र ने बिहार की झोली में 31 मेगावाट डाल दिया। अर्थात सूखे से ग्रस्त 33 जिलों के लिए एक-एक मेगावाट भी नहीं।

केन्द्रीय प्रक्षेत्र से बिहार का आवंटन सूखे की स्थिति तक 1584 मेगावाट रहेगी। इसमें 31 मेगावाट अतिरिक्त आवंटन के रूप में शामिल रहेगा। सूखे की स्थिति खत्म होते ही बिहार का कोटा अपने पुराने रूप 1553 मेगावाट में आ जाएगा। अब बिहार इस 31 मेगावाट के वितरण को लेकर कागज पर जोड़-घटाव में जुटा है। उधर सूखे से निपटने के लिए बिजली बोर्ड महंगी बिजली खरीदने को मजबूर है।

इस समय 100-250 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदकर ग्रामीण क्षेत्रों में दी जा रही है। बिजली बोर्ड के प्रवक्ता हरेराम पांडेय ने बताया कि केन्द्रीय प्रक्षेत्र से 31 मेगावाट बिजली बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। यह बिहार के मौजूदा कोटे से अलग होगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अतिरिक्त बिजली बिहार को कब तक मिलती रहेगी।

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