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159 के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई

राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य में जल संसाधन विभाग में अनियमितता, वित्तीय घोटाला और जाली भुगतान के आरोप में 29 अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया है, जबकि 159 अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है। इनमें नौ मुख्य अभियंता, सात अधीक्षण अभियंता, 33 कार्यपालक अभियंता, 43 सहायक अभियंता और 67 कनीय अभियंता हैं। इनमें से 22 अभियंता हाल ही में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

अभियंताओं पर विभाग में चल रही करोड़ों की सिंचाई योजनाओं के कार्यान्वयन में अनियमितता, घोटाला, जाली भुगतान और प्राक्कलन के अनुसार काम न होने के बावजूद भुगतान करने का आरोप है। इन मामलों में जिन अभियंताओं के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्ट्या सही पाए गए, उनके खिलाफ विभाग ने कार्रवाई कीहै। घोटालों और अनियमितताओं के ये मामले पिछले कई वर्षो के हैं।

अनियमितताओं के दोषी अभियंताओं के खिलाफ चल रही विभागीय जांच में अभी तक मात्र 55 जांच प्रतिवेदन ही विभाग को सौंपे गए है। 104 मामलों मे विभाग को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांचकर्ता अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के लिए विभाग के अवर सचिव की ओर से बार बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है, लेकिन इसका नतीजा सामने नहीं आ रहा है।

आरोपी अभियंता पैसे और पेैरवी के बल पर जांच रिपोर्ट को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ जांचकर्ता अधिकारियों का कहना है कि उन्हें नीचे के अधिकारी मापी बुक एवं अन्य कागजात बार बार मांगे जाने पर भी नहीं सौंप रहे हैं। इस कारण जांच पूरी नहीं हो पा रही है। जांच के बाद  निलंबित अभियंताओं के नाम हैं। अधीक्षण अभियंता : जगजीवन सिंह, कार्यपालक अभियंता : सुरेश प्रसाद, शशिभूषण, राजा राम सिंह, मदन प्रसाद सिंह और ब्रrादेव सिंह। 

 सहायक अभियंता : रतन कुमार विश्वकर्मा, रामकुमार सिंह, रमेश कुमार चौधरी, अजय कुमार, जय नारायण ठाकुर, रमेश सिंह, प्रकाशचन्द्र झ और हरिहर पांडेय। कनीय अभियंता : अंजनी कुमार, अनिल कुमार सिन्हा, प्रमोद पांडेय, सियाशरण, परमानंद साह, रत्नेश कुमार वर्मा, दिनेश प्रसाद सिंह, सुशील कुमार दुबे, लाल बाबू, वाइजुल हक अंसारी, राम पोद्दार, दिवाकर मिश्र, रामेश्वर शर्मा और विपिन बिहारी सिंह।

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  • Web Title:भ्रष्टाचार के आरोप में 29 अभियंता निलंबित