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ये हसीन वादियां ये खुला आसमां..

ये हसीन वादियां ये खुला आसमां..

लगभग तीन सप्ताह तक यहां रहने के बाद मैं यह सोच कर हैरान हूं कि भारत से लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते हैं।’ये उद्गार महात्मा गांधी ने तब व्यक्त किए थे, जब उन्हें अल्मोड़ा में रहने का अवसर मिला था। आधुनिकीकरण ने इस पर्वतीय शहर की रंगत को भले ही प्रभावित किया हो, पर नहीं बदला है इस शहर का मिजाज। आज भी कुमाऊं क्षेत्र के इस शहर में एक अजीब-सी शांति पसरी रहती है। लोगों और वाहनों की भीड़ यहां भी है, लेकिन यह अखरती नहीं है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इस कदर प्रभावशाली है कि यहां पहुंचते ही लोग तनाव को भूल कर खुद-ब-खुद तरोताजा हो जाते हैं। यही वजह है कि यहां आने वाले सैलानियों में बड़ी तादाद महानगरों के उन लोगों की होती है, जो कुछ सुकून तलाशना चाहते हैं।

कभी इस क्षेत्र में कत्यूरी वंश के शासक बेचाल देव का राज था। उन्होंने यहां का एक बड़ा इलाका गुजराती ब्राrाण श्रीचंद तिवारी को दान में दिया था। बाद में जब यहां चंद वंश का शासन हुआ तो सन् 1560 में राजा कल्याण चंद ने राज नगर नाम से इस शहर को बसाया था। पुराना अल्मोड़ा शहर घोड़े की नाल के आकार की पहाड़ी पर बसा हुआ है। इसके पूर्वी भाग को तलीफत और पश्चिमी भाग को सेलीफत कहते हैं। इसके ऊपरी सिरे पर यहां का पुराना लाला बाजार है, जहां ये दोनों भाग मिलते हैं। अलग-अलग शासकों द्वारा बनवाए गए प्राचीन भवनों में से अधिकांश में अब सरकारी दफ्तर चल रहे हैं।

अल्मोड़ा देखने की शुरुआत नंदा देवी मंदिर से की जा सकती है। मशहूर लाला बाजार से होते हुए यहां तक पैदल ही जाया जा सकता है। इस मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां काफी आकर्षक हैं। यहां के बस-स्टैंड के पास राजकीय संग्रहालय है। करीब दो किलोमीटर दूर ब्राइट एंड कॉर्नर है, जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के नजारे मदमस्त कर देते हैं। वैसे शाम का समय तीन किलोमीटर दूर डियर पार्क में भी बिताया जा सकता है। पिकनिक के लिए देवदार के वृक्षों से घिरे स्थान सिमतोला भी जाया जा सकता है।  काली मठ से अल्मोड़ा का नजारा मन मोह लेता है। अल्मोड़ा से करीब आठ किलोमीटर पर कुमाऊं के लोक देवता गोलूजी महाराज का मंदिर है, जहां जाए बिना इस जगह की यात्र कुछ अधूरी-सी लगेगी। 34 किलोमीटर दूर स्थित जागेश्वर धाम में कई सारे प्राचीन शिव मंदिर हैं। सड़क मार्ग से रानीखेत की ओर जाते हुए कटारमल का प्राचीन सूर्य-मंदिर भी दर्शनीय है। अल्मोड़ा का मौसम बारहों महीने खुशगवार रहता है। रहने के लिए अल्मोड़ा में दूसरे पर्यटक-स्थलों की तरह ढेरों होटल, गैस्ट हाउस हैं तो शॉपिंग के लिए कई दुकानें भी। यहां कपड़ों के अलावा प्रसिद्ध पहाड़ी मिठाई ‘बाल मिठाई‘ खरीदी जा सकती है।

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