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सैर को सवा सेर: कॉरपोरेट टूरिज्म

सैर को सवा सेर: कॉरपोरेट टूरिज्म

समय के साथ बदलते ट्रैंड्स ने आज काम के साथ पर्यटन को भी जोड़ दिया है। ‘वर्क एंड हॉलिडे’ थीम पर आधारित यह चलन कॉरपोरेट टूरिज्म कहलाता है। जरा सोचिए, अपने कार्यालय में आप पहले से रोजमर्रा के काम के दबाव में हैं। ऐसे में आपको संस्थान की किसी कॉन्फ्रेंस या लंबी मीटिंग में शामिल होने के लिए कहा जाए तो एक बार आप जरूर झुंझला जाएंगे। हां, पर अगर वह कॉन्फ्रेंस या मीटिंग आपके शहर से दूर हो, साथ ही आपको मौज-मस्ती के लिए भी पर्याप्त मौका मिले तो आपको हां करने में देर नहीं लगेगी। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आज बड़े कॉरपोरेट हाउस अपनी कॉन्फ्रेंस, मीटिंग्स, सेमिनार, कन्वेंशन आदि अपने मुख्य कार्यालय के शहर से हट कर देश या विदेश के किसी डेस्टिनेशन पर आयोजित करने लगे हैं। यह डेस्टिनेशन कोई पर्यटन स्थल या कोई खास शहर होता है, जहां ऑन डय़ूटी लोग काम के साथ रिक्रिएशन भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आज तो वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और हैरिटेज टूरिज्म को कॉरपोरेट टूरिज्म के साथ जोड़ कर आकर्षक पैकेज बनाए जाने लगे हैं। 

जो है अलग

कॉरपोरेट टूरिज्म, बिजनेस पर्यटन से थोड़ा अलग है। बिजनेस टूरिज्म केवल अपने प्रोडक्ट के ऑर्डर, डिलीवरी और भुगतान लेने आदि से जुड़ा होता है। इसमें सामूहिक पर्यटन की संभावना कम ही होती है, जबकि कॉरपोरेट टूरिज्म में डेलिगेट बड़ी संख्या में सेमिनार, कान्फ्रेंस या सेल्स मीट आदि में शामिल होने पहुंचते हैं। इसके तहत  शडय़ूल में ऑफिशियल कार्यक्रम के साथ-साथ साइट सीइंग या अन्य रिक्रिएशन गतिविधियां भी शामिल होती हैं। कई बार लंबी चलने वाले कन्वेंशन की स्थिति में कंपनियां सदस्यों के लिए ‘प्री कन्वेंशन - पोस्ट कन्वेंशन टूर’ का विकल्प चुनती हैं। सभी स्टार होटल्स में आजकल बड़े बड़े कन्वेंशन हॉल होते हैं, जहां माइक्रोफोन, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, स्लाइड शो सुविधा, टेली कॉन्फ्रेंसिंग और इंटरनेट जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। मीटिंग आदि के अलावा कर्मचारियों की ट्रेनिंग या इन्सेंटिव ट्रैवल भी कॉरपोरेट पर्यटन का हिस्सा हैं। इसके लिए हर बार नए-नए डेस्टिनेशन चुने जाते हैं। हमारे देश के बहुत से कॉरपोरेट हाउस किसी दूसरे देश में अपनी मीटिंग आदि करते हैं। उसी प्रकार हमारे यहां भी अनेक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती हैं। कॉरपोरेट टूरिज्म पर्यटन का एक ऐसा आयाम है, जो पर्यटन उद्योग की हर इकाई के लिए आय का अच्छा स्रोत बन रहा है। बड़े समूह में आए सैलानी काम के साथ जगह विशेष की साइटसीइंग, शॉपिंग और रिक्रिएशन गतिविधियों में भी शामिल होते हैं।

सरकार द्वारा बढ़ावा

कॉरपोरेट टूरिज्म की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए पर्यटन मंत्रलय ने महानगरों से अलग अन्य शहरों में कॉरपोरेट टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके तहत पर्यटन मंत्रलय हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश को नए कन्वेंशन सेंटर शुरू करने के लिए पांच करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगा, ताकि राज्यों में बड़े कॉरपोरेट हाउस को ‘एम आई सी ई’ पैकेज यानी  मीटिंग, इन्सेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन के पैकेज ऑफर करने की क्षमता हो। हर वर्ष बड़ी कंपनियां अपनी वार्षिक सभाओं के लिए नए  डेस्टिनेशंस की तलाश में रहती हैं। ऐसे में हमारे देश में कॉरपोरेट टूरिज्म की संभावनाएं और बढ़ेंगी और राज्यों के पर्यटन उद्योग की आय भी बढ़ेगी। अपने देश के कॉरपोरेट हाउस विदेशों की बजाय अपने देश में ही नए डेस्टिनेशन का लाभ उठाएंगे। मंत्रलय का उद्देश्य कमजोर नेटवर्क की वजह से अब तक अछूते रहे डेस्टिनेशंस को भी कॉरपोरेट पर्यटन मानचित्र पर लाना है। इसके लिए दूर-दराज के पर्यटन स्थलों को हेलीकॉप्टर सुविधा से जोड़ने के लिए वहां हेलीपोर्ट बनाने की भी योजना है। इससे देश में हेली टूरिज्म भी शुरू हो सकेगा।

कॉरपोरेट टूरिज्म पर्यटन उद्योग का एक सशक्त आयाम है। ग्लोबल मार्केट में भारत तेजी से एक विश्व स्तरीय कन्वेंशन डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। कॉरपोरेट टूरिज्म सैक्टर में यहां हर वर्ष 15 से 20 प्रतिशत की प्रगति दर्ज की गई है। एक अनुमान के अनुसार पिछले वर्ष इस सैक्टर में इनबाउंड कन्वेंशन मार्केट में 40 मिलियन डॉलर से अधिक का व्यवसाय किया गया।

हमारे देश के टॉप कन्वेंशन सेंटर, विज्ञान भवन, नई दिल्ली
रेनेसां होटल एंड कन्वेंशन सेंटर, मुम्बई
हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, हैदराबाद
हैबिटेट वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली
चेन्नई कन्वेंशन सेंटर, चेन्नई
बी एम बिरला कन्वेंशन सेंटर, जयपुर
जे पी होटल्स एंड कन्वेंशन सेंटर, आगरा
कोचीन कन्वेंशन सेंटर, कोच्चि

इनमें मुम्बई रेनेसां होटल एंड कन्वेंशन सेंटर देश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर है। विज्ञान भवन में अधिकतर महत्त्वपूर्ण विश्व-स्तरीय कन्वेंशन का आयोजन होता है। अधिकतर फाइव स्टार होटल्स में भी कन्वेंशन सुविधाएं हैं, जिनकी क्षमता 500 से 1200 लोगों तक है। देश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर दिल्ली में खोलने की योजना है।

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