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सूखे पर हो रही है राजनीति

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और बसपा के चारों ओर ऐसी राजनीतिक लड़ाई छिड़ी हुई है जिसका खामियाज बेचारी जनता को भोगना पड़ रहा है।  सूखे का साया मंडरा रहा है। बारिश जैसी होनी चाहिए थी, नहीं हुई।  ऐसे में एक तो पहले ही धान की रोपाई कम हुई ऊपर से जो हुई भी वो सूखने की कगार पर है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कई जिले हैं जहां पानी की कमी के चलते गन्ने की बढ़त तो रुक ही गई है साथ ही अन्य फसलें भी चौपट हो रही हैं। उत्तर प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं जहां 50 प्रतिशत से कम बुआई हुई है तथा साथ ही 40 प्रतिशत से कम बारिश हुई है लेकिन सूबे की मुखिया ने ऐसे जिलों को सूखाग्रस्त जिलों में शामिल नहीं किया जबकि राज्य के मुख्य सचिव भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि 71 में से 60 जिले अत्यधित प्रभावित हैं।

अनूप आकाश वर्मा,  नई दिल्ली

ठहरे पानी ने खोली पोल

बीते दिनों गर्मी से बुरा हाल था और सभी बरसात का इंतजार बेसब्री से कर रहे थे और जब बरसात हुई तो नई-नई समस्याओं से रूबरू होना पड़ा। राष्ट्रीय राजधानी 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में लगी हुई है लेकिन दिल्ली की जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बीते दिनों की बारिश से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली की 60 वर्ष पुरानी जल निकासी की व्यवस्था आज के अधिभार को नहीं झेल पा रही है।  सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द इस जल निकासी की समस्या से निजात हेतु ठोस व्यवस्था करे। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान ऐसी स्थिति देखकर विदेशी खिलाड़ियों और मेहमानों के मन में भारत की क्या छवि बनेगी?

शक्तिवीर सिंह ‘स्वतंत्र’ नई दिल्ली

हम स्वयं जिम्मेवार

आज हमारा देश भ्रष्टाचार, आतंकवाद व बेरोजगारी जैसी अनेक समस्याओं से घिरा है। इन समस्याओं पर विचार करें तो ऐसा लगता है कि हम नहीं, कोई अन्य जिम्मेदार है। जब तक हम दूसरे को दोषी समझते रहेंगे तब तक समस्याओं का निराकरण नहीं हो सकता। आज हमने कानून व्यवस्था के नाम पर जितनी लाठियां, गोलियां स्वतंत्र भारतवासियों पर चलाई हैं, शायद उतनी अंग्रेजों ने भी नहीं चलाई होंगी। जब विदेशी आक्रमणकारी भारत से सोना-चांदी लूटकर ले गये, तब देश गरीब हुआ, अब स्वदेशी लुटेरे कौन हैं जो देश का धन समेट कर विदेशी बैंकों में जमा कर रहे है। इन सबके के लिए हम स्वयं जिम्मेदार है।

शूरवीर सिंह राणा,  देहरादून

कम हो महंगाई

दिन-प्रतिदिन बढ़ती हुई महंगाई भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एक आम आदमी के जीवन को भी कठिन बनाती ज रही है। जनता द्वारा लगातार दूसरी बार कांग्रेस को सत्ता में लाने से कांग्रेस पर भी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दायित्व है। ऐसे में यह देखना आवश्यक है कि क्या कांग्रेस जनता की आवश्यकताओं को समझ पायेगी और महंगाई पर अंकुश लगेगा?

निम्मी पटवाल,  देहरादून

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