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छह सौ से ज्यादा उम्र कैदी फरार हैं

प्रदेश की 62 जेलों के छह सौ से अधिक कैदी पिछले सात साल से फरार हैं। यह कैदी जेल तोड़कर, अदालत की हवालात से या पुलिस हिरासत से नहीं फरार नहीं हुए बल्कि इन्हें 26 जनवरी 2000 को राज्य सरकार के आदेश से छोड़ा गया था।

बाद में हाईकोर्ट और फिर सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर इन्हें दोबारा गिरफ्तार करने का आदेश हुआ पर छोड़े गए ज्यादातर कैदी अब तक खुली हवा में घूम रहे हैं। जेलों से बार-बार एसपी और डीएम को रिमाइंडर भेजे जाते हैं पर इनकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही।

इन फरार कैदियों का ताजा संदर्भ इस नजरिए से प्रासंगिक है कि राज्य सरकार के उसी पुराने फैसले के कारण बीते कई वर्षो से यूपी शासन व राजभवन अब बेहद लाचार, अशक्त, वृद्ध और कमजोर हो चुके कैदियों को नहीं छोड़ रहा। दूसरी तरफ उन फरार कैदियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा जो हाईकोर्ट की दृष्टि से सजामाफी के पात्र नहीं थे।

26 जनवरी 2000 को सरकार के एक आदेश से करीब एक हजार कैदी रिहा कर दिए गए। आदेश में कहा गया था कि उम्रकैद के ऐसे बंदी जिन्होंने 14 साल की सश्रम सजा समेत जेल में बीस साल पूरे कर लिए हैं उन्हें छोड़ दिया जाए। इसके अलावा साठ वर्ष से ऊपर के पुरुष और पचास वर्ष से ऊपर की उन महिलाओं को भी रिहा करने का हुक्म दिया गया था जिन्होंने तीन साल की सजा पूरी कर ली थी। इसमें हत्याकांडों में शामिल रहे अपराधी भी छूट गए जिसके खिलाफ पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट में गए।

हाईकोर्ट ने उनकी दलील को सही मानते हुए शासनादेश को खारिज करते हुए गिरफ्तार करने को कहा था। साथ ही यह भी कहा कि सरकार आममाफी नहीं दे सकती बल्कि संवैधानिक व्यवस्थाओं के मुताबिक केस टू केस निर्णय कर सकती है। इस फैसले के बाद तीन सौ से कुछ अधिक कैदियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया पर बाकी अब तक फरार हैं।

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