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ग्राम प्रधानों ने दी मध्यान्ह भोजन योजना रोकने की चेतावनी

उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधानों के संघ ने राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न् भोजन योजना को रोकने की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि इस योजना के लिए अब वह भोजन के लिए प्रति बच्चा 2.50 रुपये की राशि अदा नहीं कर सकते हैं। संघ के मुताबिक लंबे समय से उन्हें बकाया पैसे भी नहीं मिल पाए हैं।

प्रदेश ग्राम प्रधान संघ (पीजीपीएस) के प्रमुख आर. के. सिंह का कहना है, ‘‘खाने के लिए हर एक बच्चे पर 2.50 रुपया दिया जाता है। यह दो वर्ष पुरानी दर है। खर्च बढ़ गया है इसलिए यह राशि अब नाकाफी है।’’

सिंह कहते हैं, ‘‘2.50 रुपये में से प्रति बच्चा खानसामे को 40 पैसे दिए जाते हैं। शेष 2.10 रुपये खाने-चीनी, तेल, सब्जियां, दूध, मसाले इत्यादि- पर खर्च किया जाता है। इतने पैसे में अब भोजन उपलब्ध करा पाना असंभव हो गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘खराब गुणवत्ता वाला भोजन दिया जाना भी हमारी चिंता का विषय है। राज्य के 30 फीसदी स्कूल अभी भी इस योजना को शुरू नहीं कर पाए हैं जबकि 30 फीसदी स्कूलों में सप्ताह में सिर्फ दो ही दिन भोजन दिया जाता है।’’

उल्लेखनीय है कि हाल ही में सिद्धार्थनगर जिले के एक स्कूल में मध्याह्न् भोजन से 50 छात्र बीमार पड़ गए। इनमें से सात अभी भी जिला अस्पताल में भर्ती हैं।

राज्य का बुनियादी शिक्षा विभाग इस योजना की खामियों के लिए राज्य मध्याह्न् भोजन प्राधिकरण (एसएमडीएमए)को जिम्मेदार ठहराता है।

विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘हमने यह राशि बढ़ाने के लिए प्राधिकरण को सुझाव भी भेजा लेकिन हमारे सुझाव वहां धूल फांक रहे हैं। हम बार-बार इस मसले को उठाते रहे हैं लेकिन हमें अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है।’’

प्रधाकिरण का दावा है कि निर्धारित समय पर राशि और अनाज जारी  किए जाते हैं।

एसएमडीएमए के निदेशक संतोष कुमार ने बताया, ‘‘जुलाई से सितम्बर माह के लिए राशि और अनाज राज्य के सभी जिलों में भेज दिए गए हैं। केंद्र सरकार यह राशि बढ़ाने को तैयार भी हो गई है। हमें उम्मीद है कि यह राशि जल्द ही बढ़ा दी जाएगी।’’

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