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वेश्यालयों से छुड़ाई गई लड़कियों का उचित पुनर्वास हो: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने देश के विभिन्न वेश्यालयों से छुड़ाई गई लड़कियों और बच्चों की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए कार्यपालिका और केंद्र सरकार को उनके लिए पुनर्वास कानून या योजना तैयार करने को कहा है।
 
न्यायमूर्ति एस बी सिन्हा और न्यायमूर्ति सिरियाक जोसेफ की खंडपीठ ने एक फैसले में कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जांच अधिकारी और अदालतें मुक्त कराई गई लड़कियों एवं बच्चों तथा इस तरह के अनैतिक धंधा कराने वालों के बीच सामान्यत स्पष्ट अंतर नहीं कर पाती हैं।
 
न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से ऐसे कुछ आरोपियों को मिली जमानत को खारिज करने के लिए दायर स्वंयसेवी संगठन एनजीओ गोरिया स्वयं सेवी संगठन की अपील को खारिज करते हुए कहा कि कार्यपालिका के साथ विधायिका भी मुक्त कराए गए बच्चों के समाज में पुनर्वास के लिए सुविचारित योजनाझ्रकानून नहीं बनाने में विफल रही है।
 
खंडपीठ ने कहा कि अनैतिक देहव्यापार के पीडि़तों में ज्यादातर नाबालिग लड़कियां होती हैं और उन्हें यूं ही छोड़ दिया जाता है। बाद में उन्हें मजबूरी वश फिर वेश्यालयों में लौट जाना पड़ता है। जहां से उन्हें मुक्त कराया गया होता है। उल्लेखनीय है कि पुलिस ने एक एनजीओ की मदद से वाराणसी के रेडलाईट इलाके में 30 नाबालिग लड़कियां और बच्चे मुक्त कराए थे। इस मामले में 23 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
 
उच्चतम न्यायालय ने आरोपियों को जमानत देने के लिए उच्च न्यायालय की खिंचाई करते हुए कहा कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता पर भी पर्याप्त विचार किया जाना चाहिए। अदालतों को ऐसे मामलों को बड़ी सावधानी से देखना चाहिए।

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  • Web Title:वेश्यालयों से छुड़ाई गई लड़कियों का पुनर्वास हो: सुप्रीम कोर्ट