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हरियाणा में अलग एसजीपीसी के गठन पर हंगामा

हरियाणा में अलग एसजीपीसी के गठन पर हंगामा

हरियाणा सरकार की ओर से अलग शिरोमणी गुरद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) गठित किए जाने की घोषणा पर शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया। इसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा व अकाली दल के सदस्यों ने हरियाणा सरकार के इस फैसले का विरोध किया और इस मसले पर जमकर हंगामा किया।

लोकसभा में अकाली दल के रतन सिंह अजनाला और हरसिमरत कौर ने यह मामला उठाया। भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अन्य घटक दलों ने इस मुद्दे पर अकाली सदस्यों का जोरदार समर्थन किया। इस बीच अजनाला और कौर लोकसभा अध्यक्ष के आसन के करीब आ गए। अजनाला ने कहा कि इस मसले पर जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा वह यहीं बैठे रहेंगे।

विपक्षी सदस्य इस मसले पर प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा की मांग कर रहे थे। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इसे अस्वीकार कर किया।

उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल चलने दें और इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाए। लेकिन भाजपा व अकाली सदस्यों ने हंगामा जारी रखा। इसके चलते उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

उधर, राज्यसभा में सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। शपथ दिलाए जाने के बाद अकाली दल और भाजपा के सांसदों तथा निर्दलीय तरलोचन सिंह ने इस मसले को उठाया और प्रश्नकाल स्थगित कर इस पर चर्चा की मांग की।

भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। यह लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला है। इसलिए सदन में पहले इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए।

सभापति हामिद अंसारी ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल चलने दें और उसके बाद इस मसले को उठाए लेकिन भाजपा और अकाली सदस्यों ने इस पर हंगामा आरंभ कर दिया जिसके चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने गत शुक्रवार को घोषणा की थी कि एक नवम्बर को हरियाणा में अलग एसजीपीसी का गठन किया जाएगा।

हरियाणा में सात प्रमुख और ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। ये सभी अमृतसर स्थित एसजीपीसी के सीधे नियंत्रण में हैं जबकि राज्य के 18 अन्य गुरुद्वारों पर भी अप्रत्यक्ष तौर पर एसजीपीसी का ही नियंत्रण है। एसजीपीसी ही सिख धर्म से जुड़े मामलों और गुरुद्वारों को नियंत्रित करती है।

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