DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सूखा संकट : सात दिन बिहार पर भारी

हालात नहीं सुधरे तो छायेगा खाद्यान्न संकट
मुख्यमंत्री ने की सूखे की स्थिति की समीक्षा
2.25 करोड़ परिवारों को देना पड़ेगा एक-एक क्विंटल अनाज
50 प्रतिशत धान की फसल स्थाई रूप से चौपट
सरकारी टय़ूब वेल के पास लगेंगे पशु शिविर
केन्द्र से 9000 करोड़ रुपये मांगने की तैयारी


अगले सात दिन बिहार पर भारी पड़ने वाले हैं! अगर दस अगस्त तक पूरे राज्य में जोरदार बारिश नहीं हुई तो सरकार के सामने प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने से अधिक लोगों के पेट भरने की चुनौती होगी। बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक दर्जन विभागीय सचिवों के साथ ढाई घंटे तक सूखे की स्थिति की समीक्षा की। यह साफ हो गया कि बारिश नहीं हुई तो 2.25 करोड़ परिवार खाद्यान्न संकट से जूङोंगे। इतने परिवारों को एक-एक क्विंटल अनाज देने के लिए 22.5 लाख टन खाद्यान्न की व्यवस्था करनी होगी। मुख्यमंत्री ने अनाज के बंदोबस्त की जिम्मेदारी खाद्य सचिव को सौंप दी है जो सात अगस्त को दिल्ली में आयोजित बैठक में बिहार की समस्या को रखेंगे। आठ अगस्त को मुख्य सचिव भी केन्द्रीय कैबिनेट सचिव द्वारा बुलाई बैठक में खरीफ संकट का मामला उठायेंगे। जुलाई तक वर्षा में 44 प्रतिशत की कमी रही। इससे बिहार धान की 50 प्रतिशत उपज तो अभी गंवा बैठा है। सूखा संकट पर मुख्यमंत्री भी जल्द ही प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखेंगे।  
   

बैठक में साफ हो गया है कि दस अगस्त तक स्थिति की समीक्षा करने के बाद बिहार को किसी भी पल सूखाग्रस्त घोषित कर दिया जायेगा। अबतक यह काम 15 अगस्त या उसके बाद करने का मन बनाया गया था। मुख्यमंत्री ने अलग-अलग विभागों द्वारा सूखे से निबटने के लिए तैयार किये गये आकस्मिक योजना की भी समीक्षा की। पशुपालन विभाग सरकारी टय़ूब वेल के निकट पशु शिविर लगाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। ताकि पशुओं को चारा और पानी एक ही स्थान पर मिल सके। वर्षा की हालत को देखते हुए राज्य में अक्टूबर के अंत तक चारा संकट भी उत्पन्न होने की आशंका है। राज्य में जुलाई तक 549 मिमी की तुलना में 307 मिमी वर्षा हुई है। नरेगा को जल प्रबंधन से जोड़ा गया है। इसके तहत गांवों में तालाब और नये कुएं खुदवाए जायेंगे। वित्त विभाग ने संकट गहराने पर किसानों का कर्ज स्थगित कराने की भी तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच सरकार ने केन्द्र से सूखा पैकेज मांगने की भी तैयारी पूरी कर ली है। स्थिति जस की तस बनी रही तो कृषि इनपुट सब्सिडी के लिए 2000 करोड़, राहत अनाज बांटने के लिए 3750 करोड़, रोजगार के लिए 2000 करोड़, सिंचाई के लिए 500 करोड़, पेयजल के लिए 400 करोड़ और पशुचारे के लिए 350 करोड़ रुपये की मांग की जायेगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सूखा संकट : सात दिन बिहार पर भारी