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विदेशियों की नकल कब तक?

विदेशियों की नकल करने में हम कभी पीछे नहीं रहे, पहले ‘बिग ब्रदर’ की नकल पर ‘बिग बॉस’ और अब अमेरिकी शो ‘मोमेंट ऑफ ट्रथ’ की नकल पर स्टार प्लस पर शुरू हुए ‘सच का सामना’ शो ने जो सुर्खियां बटोरीं, वो वाकई काबिले तारीफ है। एक शो के माध्यम से भारत में सच बोलना सिखाया जा रहा है, जहां वेदों और ग्रंथों में आदिकाल से सत्यवादी बनने को कहा गया है। यह सच का सामना सच भी कैसे-कैसे सच सामने ला रहा है, जो कि पब्लिसिटी स्टंट के अतिरिक्त कुछ और नहीं है। रियलिटी शो के नाम पर विदेशों के टीवी कार्यक्रम की नकल, हमारे भारतीय संस्कृति और समाज पर थोपा जा रहा है, जिसका असर दूरगामी हो सकता है।  
शक्तिवीर सिंह ‘स्वतंत्र’, जामिया

पंचायत का क्रूर फैसला
हमारे देश में पहले पंचायतों के द्वारा जो निर्णय लिए जाते थे, वे सर्वप्रिय होते थे। आज ऐसा नहीं है। पंचायत के द्वारा जो फैसले लिए जाते हैं, वे सब कानून से अलग हटकर लिए जाते हैं। शादी-विवाह दो परिवार तथा समुदाय के बीच की कड़ी को जोड़ते हैं, लेकिन हाल ही में हरियाणा में पंचायत के द्वारा जो फरमान जारी किया गया, उसके बारे में कभी सोचा भी नहीं जा सकता था। क्या आपको नहीं लगता कि देश का कानून पंचायत के फरमान के सामने बौना साबित हुआ।
बीना रानी टाकं, हिन्दू कालेज, दिल्ली

बंद ही विकल्प क्यों?
गत 11 जुलाई, 2009, से दाजिर्लिंग पूर्ण रूप से बंद है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस, चाय बागान अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं। यहां के नन्हें बच्चे चाहते हुए भी स्कूल नहीं जा सकते। किसी के घर में मां बीमार होगी, किसी का बच्चा पैदा हुआ होगा और किसी को अपने भाई-बहन की शादी में पहुंचना होगा। लेकिन परदेश में रहने वाले भी अपने घर नहीं पहुंच सकते। बंगाल सरकार हमें सड़ा हुआ आलू समझती है। इसलिए मैं भारत सरकार और मीडिया वालों से विनम्र विनती करता हूं कि वे अपने देश के एक सुंदर हिस्से दाजिर्लिंग की खोज खबर रखें और जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान कराएं।
इशु चामलिंग, लिंगे चियावाशे, दाजिर्लिंग

असली क्या, नकली क्या
सरकार दवाओं में मिलावट की बात सुनकर सन्न रह गई। बहुत माथापच्ची के बाद यह फैसला किया गया कि नकली दवाओं की सूचना देने वाले व्यक्ति को 20 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। नकली दवाओं को बेचने वाले, नकली दवाओं को बनाने वाले तथा उन्हें सप्लाई करने वाले, इन सभी को आरोप की एक ही श्रेणी में रखा जाना चाहिए। ये प्रावधान सिर्फ नकली दवाओं पर ही नहीं, वरन हर मिलावट पर लागू होना चाहिए। इस गंभीर अपराध के लिए दंड केवल और केवल मृत्युदंड ही होना चाहिए उससे कम नहीं।
इन्द्र सिंह धिगान, दिल्ली

यह कोई तर्क नहीं
एक जनहित याचिका पर निर्णय देते हुए माननीय न्यायाधीश का कथन कि यदि यह सीरियल भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो आप सीरियल सच का सामना मत देखिए। युक्तिसंगत नहीं लगा। इस सीरियल के कुछ प्रश्न आपित्तजनक हैं। उनके उत्तर सभ्य समाज में सार्वजनिक रूप से नहीं दिए जा सकते हैं। टीवी सीरियलों की स्वतंत्रता वहीं तक जा सकती है, जहां से अश्लीलता की सीमा आरंभ होती है।
ब्रज मोहन, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

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