सलाखों में बंद भाइयों की कलाइयों पर भी सजी राखी - राखी बांधते वक्त बहनाओं के छलक पड़े आँसू DA Image
21 फरवरी, 2020|3:43|IST

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राखी बांधते वक्त बहनाओं के छलक पड़े आँसू

भाई-बहनों के बीच प्यार और दुलार का प्रतीक रक्षा बंधन पर जो बहने हंसते अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती रही, आज उन बहनाओं के राखी बांधते वक्त आँसू झलक पड़े। इनमें कई ऐसी बहनाएं थीं, जो भाइयों की ढांढस बंधाने पर ही चुप हुई।

फिर भी उनकी सिसकी बंद होने का नाम नहीं ले रही थीं। यह नजारा था बुधवार को बल्लभगढ़ सब-जेल का। रक्षा बंधन के पवित्र त्यौहार को लेकर सुबह होते ही भाइयों की कलाइयों पर राखी सजाने उनकी बहनाएं जेल के द्वार पर पहुंच गई। सुरक्षा के मद्देनजर तलाशी के बाद उन्हें भाइयों से मिलने की इजाजत दी गई। सलाखों के पीछे भाइयों को देख राखी बांधने आई बहनाएं अपने को नहीं रोक सकी।

नम आंखों से उन्होंने भाई को जल्द सलाखों से बाहर आने की कामना करते हुए उन्हें तिलक लगाकर मिठाई खिलाई। कई बहनाएं ऐसी थीं, जो रक्षा कवच रूपी राखी को बांधते वक्त रो पड़ी। बहन के आंसू देख कई बंदी भी अपने आंसू थाम नहीं सके। इस नजारे को देख सब-जेल के तैनात कर्मचारियों के चेहरे पर भी भावुकता साफ छलक रही थी। इसी बीच उन्होंने समय पूरा होने की बात कहते हुए बहनों को बाहर जाने की बात कही।

जाते- जाते वे अपने भाइयों की लंबी आयु की कामना करते हुए जेल से बाहर निकली। अलीगढ़ के गांव पावटी से चलकर अनीता सुबह ही सब-जेल पहुंच गई थी। ओल्ड फरीदाबाद के संत नगर की गीता, सीही से संता देवी, सुंदरी, रमेश देवी, आशा, मीना, पुष्पा समेत कई बहनाएं ऐसी थी, जो समय से पहले ही सब-जेल पहुंच गई। जब तक वे अपने भाइयों को राखी नहीं बांध सकी, तब तक वे दूर से ही सब-जेल की सलाखों की ओर निहारती रहीं। राखी बांधने के बाद ही उन्हें सुकुन मिला।

 

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  • Web Title:सलाखों में बंद भाइयों की कलाइयों पर भी सजी राखी