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अबूझ पहेली बनी शिक्षक बहाली

दूसरे चरण की शिक्षक बहाली अभ्यर्थियों के लिए अबूझ पहेली बन गई है। किसी को नहीं पता कब होगी बहाली? मंत्री से लेकर विभाग के अधिकारी तक कई दफा बहाली प्रक्रिया संपन्न होने को लेकर अलग-अलग डेडलाइन जारी कर चुके हैं जो सारी की सारी फेल हो चुकी हैं।

हालत यह है कि अब कोई भी नियोजन पत्र बंटने की नई तिथि मुकर्रर करने से हिचक रहा है। अभी तक हाय-तौबा मची थी कि प्रमाण पत्रों की जांच में काफी समय लग रहा है। खासकर बाहर के प्रमाण पत्रों में। लेकिन चिन्ता वाली बात नहीं है। विभाग के शिक्षा अधिकारियों को खास तौर से इस काम के लिए भेजा गया है।

तभी नया तथ्य यह सामने आया है कि अभी तो छह जिलों की अधिकतर ग्राम पंचायतों के मुखिया-पंचायत सचिव ने अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र विभागीय अधिकारियों को दिए ही नहीं हैं। बाकी जिलों में भी कुछ ग्राम पंचायतों का यही हाल है। ऐसे में इनकी डिग्रियों और प्रमाण पत्रों की जांच कब होगी यह सोचने का विषय है।

प्रधान शिक्षा सचिव अंजनी कुमार सिंह ने इसके लिए 20 अगस्त तक की समय सीमा तय की है। साथ ही चेताया है कि यदि तब तक प्रमाण पत्र वे विभागीय अधिकारियों को नहीं भेजते हैं तो संबंधित इकाइयों में नियोजन प्रक्रिया रोक दी जाएगी। श्री सिंह का कहना है कि इसके कारण नियोजन की प्रक्रिया बाधित हो रही है और सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है।

उन्होंने दोषी व्यक्तियों-अधिकारियों पर कार्रवाई की बात भी कही है। यहां गौरतलब है कि इस तरह के निर्देश जिसे ‘सख्त’ माना जाता है, विभाग के विभिन्न स्तर के अधिकारियों द्वारा दूसरे चरण की बहाली के दौरान अनेक बार जारी किया जा चुका है। मगर शायद ही उसे डीएसई-डीईओ स्तर के अधिकारियों ने कभी गंभीरता से लिया है, मुखिया-पंचायत सचिव द्वारा नोटिस लिया जाना तो दूर की बात है। इस बार प्रधान सचिव के निर्देश का क्या गुल खिलाता है, देखना दिलचस्प होगा।

 

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