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किसानों को भाड़े पर देने के लिए वर्ष 2001 में खरीदे गये थे 38 ट्रैक्टर

किसानों को भाड़े पर देने के लिए खरीदे गये 38 सरकारी ट्रैक्टरों का कोई लेखा-जोखा विभाग के पास नहीं है। कृषक सेवा केन्द्र खोलकर पंचायतों को दिये गये ये ट्रैक्टर मुखियों के दरवाजे की शोभा बढ़ा रहे हैं।

हद तो यह है कि हारने के बाद भी पुराने मुखियों ने सरकार की इस संपत्ति को नये मुखियों के हवाले नहीं किया। विभाग अब टोह ले रहा है कि 38 सरकारी ट्रैक्टर किन पंचायतों में है और वहां के कितने किसान उससे लाभान्वित हो रहे हैं। कितनी राशि भाड़े के रूप में प्राप्त हुई और रख-रखाव पर कितना खर्च हुआ। हालांकि सच्चाई यह है कि एक भी किसान इस योजना से लाभान्वित नहीं हो सके हैं। दियारा इलाके के किसान तो इस योजना के बारे में जानते भी नही हैं।

मामला दियारा एवं टाल क्षेत्र के विकास के लिए वर्ष 2001 में बनी योजना से जुड़ा है। योजना के अनुसार डीडीसी की अनुशंसा पर टाल और दियारा क्षेत्र में पड़ने वाली पंचायतों का चयन कर वहां कृषक सेवा केन्द्र की स्थापना करनी थी। राज्य के 19 जिलों में ऐसे केन्द्रों की स्थापना की गई। इन केन्द्रों को 38 ट्रैक्टर के अलावा अन्य कृषि यंत्रों की खरीद के लिए राशि दे दी गई।

लेकिन ट्रैक्टर अब किसके पास है इसका पता सरकारी अधिकारियों को भी नहीं है। जबकि इन ट्रैक्टरों को डीडीसी द्वारा निर्धारित किराये पर इलाके के हर किसान को उपलब्ध करना था। रख-रखाव की जिम्मेदारी पंचायतों की थी। हर माह आय-व्यय का ब्योरा जिला कृषि पदाधिकारी को भेजना था।

जानकारी के अनुसार पटना जिले में पांच केन्द्र खोलकर उन्हें ट्रैक्टर दिये गये थे। लखीसराय में तीन, मुंगेर में चार, शेखपुरा में एक, नालंदा, भोजपुर, भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय, वैशाली और समस्तीपुर जिले में दो-दो और पूर्वी चम्पारण,सहरसा, सुपौल कटिहार,बक्सर और शेखपुरा में एक ट्रैक्टर दिये गये थे।

कृषि मंत्री रेणु कुमारी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी जांच की जाएगी। जिन जिलों में टैक्टर बांटे गये थे वहां के जिला कृषि अधिकारी से इसकी जानकारी ली जाएगी।

 

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  • Web Title:मुखियों के दरवाजे की शोभा बढ़ा रहे हैं सरकारी टैक्टर