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कुसुम की किस्मत से चमका शराब का कारोबार

कुसुम अग्रवाल किस्मत की धनी हैं ! इसे सच साबित किया है इनके परिवार के शराब के बढ़ते कारोबार ने। इनकी सुराल का यह पुराना धंधा है। जब से इनका इससे नाम जुड़ा, व्यापार ने दिनों दिन तरक्की ही की है। पिछले कई वर्षो तक लक्की ड्रा में इनके नाम से शराब के ठेके निकलते रहे। जब एक अप्रैल से नई आबकारी नीति के तहत नए ढंग से शराब का कारोबार शुरु हुआ तो इसमें भी इन्होंने झंडे गाड़ दिए। अभी कुसुम अग्रवाल शहर के दस बड़े और प्रमुख शराब के ठेकों की मालकिन हैं। इनकी खुशकिस्मती के आगे दिग्गज शराब के कारोबारियों की एक नहीं चली।


नए वित्त वर्ष से हरियाणा में नई आबकारी नीति लागू हुई है। इसके तहत 23 मार्च को शराब के ठेके बोली लगाकर छोड़े गए। पहले लॉटरी से शराब के ठेके छोड़ जाते थे। शहर के प्रमुख शराब के कारोबारी लाला रतन गुप्ता की बड़ी बहू कुसुम अग्रवाल परिवार में सौभाग्यशाली मानी जाती हैं। इसलिए इनकी किस्मत बारबार शराब के कारोबार में आजमाई जाती रही। कुसुम कहती हैं..ठेका लेने तक कागजों पर उनके हस्ताक्षर चलते हैं। इसके हाथ आते ही कारोबार पित संभाल लेते हैं।


पिछले साल भी इनकी किस्मत आजमाई गई और फरीदाबाद, गुड़गांव व पलवल के पंद्रह शराब के ठेके अपने नाम कर लिए। इस बार तो उन्होंने तमाम दिग्गज बोलीदाताओं को पछाड़ते हुए सबसे ज्यादा पांच करोड़ 76 लाख 80 हजार रुपये की बोली लगाकर बदरपुर बार्डर नंबर एक का अहम ठेका अपने नाम किया है। अलग बात है कि उन्हें इस कारोबार में रत्ती बराबर दिलचस्पी नहीं।


लाला रतन गुप्ता का परिवार शराब के कारोबार में 1965 से है। इनके बड़े बेटे तथा कुसुम के पति देवेंद्र गुप्ता जब दस साल की उम्र के थे। पिता के कारोबार में हाथ बंटाया करते थे। इस परिवार का शराब के अलावा रीयल एस्टेट, सिनेमा आदि का भी बिजनेस है। कुसुम की सास शीला देवी की किस्मत भी शराब के ठेके में आजमाई जा चुकी है। देवेंद्र की माने तो 1976 में उनकी मां के नाम एक ठेका था। वह कहते हैं..भले ही ठेके लेने में महिलाओं को आगे किया जाए, पर सारा कारोबार परिवार के पुरुष ही संभालते हैं। कुसुम कहती हैं..उन्हें खुशी है कि उनकी किस्तम परिवार के कारोबार को बढ़ाने के काम आ रही। दो बच्चों की मां कुसुम एक बार नगर परिषद का चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
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--2008 में कुसुम के नाम थे शराब के पंद्रह ठेके
--शराब की सबसे बड़ी महिला ठेकेदार को इसके कारोबार में दिलचस्पी नहीं
--कारोबार पति संभालते हैं
-आबकारी एवं काराधान आयुक्त अशोक शर्मा: ठेका भले किसी के नाम हो। उसके संचालन की जिम्मेदावरी वह किसी को भी सौंप सकता है
कुसुम अग्रवाल: उन्हें खुशी है, उनकी किस्तम परिवार के कारोबार को बढ़ाने के काम आ रही है

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