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महिलाओं के हौंसले के आगे तकदीर झुकी

व्यवसाय के क्षेत्र में महिलाओं की परिकल्पना महज ब्यूटीशियन और बुटीक तक ही सीमित नहीं। आधुनिक दौर में उनकी सोच और साहस काफी आगे निकल चुकी है। अर्थोपाजर्न कहे या खुद को साबित करने की चाह वो पुरुषों के बर्चस्व वाले क्षेत्र में भी अपनी किस्मत आजमाने को मजबूर हैं। इसका उदाहरण है सुनीता पुजारा। उनका शहर में लोहे के स्क्रैप का धंधा है। उनकी जैसी और भी कई हैं इस शहर में। ी

 कभी गृहणी रही सेक्टर-16ए की सुनीता आज अपने इस कारोबार में बहुत आगे निकल चुकी हैं। बीते दिनों को याद कर वह बताती हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी स्क्रै प का धंधा करने का नहीं सोचा था। पति की अचानक मौत के बाद उनके बिजनेस को बड़ा घाटा ङोलना पड़ा। इससे निपटने को जब उन्हें कोई राह न सूझ तो पति के पेशे को अपना लिया। उसके इस फैसले को पहले लोगों ने सही नहीं ठहराया। कोई उसे ब्यूटीशियन और बुटीक खोलने की सलाह देता था कोई स्कूल खोलने का। लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। अपने छोटे बच्चों को अच्छा जीवन देने को वह स्क्रैप के बिजनेस में कूद पड़ीं। उनका सपना अपने पति की विरासत को सफलता के शिखर तक पंहुचाना है। आज उनकी बाटा चौक स्थित बीपी इंटरप्राइजेज नामक स्क्रैप की कंपनी हैं। इसके साथ इनकी कंपनी मेटल कंपोनेंट भी तैयार करती है। वह विभिन्न कंपिनयों से ट्रकों में भरकर स्क्रैप मंगवाती हैं। उसके कुछ हिस्से को अपनी कंपनी में छोटे-कलपुर्जे बनाने में इस्तेमाल करती हैंऔर बाकी बड़ी कंपनियों को बेच देती हैं। उनके मुताबिक तीन महीने में वह तकरीबन 40 लाख रुपये का कारोबार कर लेती हैं। 


 शहर में सुनीता पुजारा एकमात्र ऐसी महिला नहीं है। यहां अनेकों ऐसे उदाहरण हैं। बात सिक्योरिटी गार्ड की हो या फिर पेट्रोल पंप में काम करने वालियों की। महिलाएं पीछे नहीं हैं। शहर में एक विधवा महिला अपने दम पर गैस एजेंसीज चला रही हैं। एक ने तो पैट्रोल पंप का व्यवसाय संभाल रखा है। यहां की कई लड़कियां पैट्रोल पंप पर मुस्तैद हैं।

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