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सूबे के विश्वविद्यालयों में लंबित हैं अवमाननावाद के 1540 मामले

सूबे के विश्वविद्यालयों में कोर्ट की अवमानना के 1540 मामले लंबित हैं। मानव संसाधन विभाग में इन मामलों की फाइल हर दिन मोटी हो रही है। इसको लेकर राज्य सरकार गंभीर है। मानव संसाधन विकास विभाग के सचिव के के पाठक ने मंगलवार को सभी विश्वविद्यालय के लॉ अफसरों को अवमाननावाद (एमजेसी) के लंबित मामलों को लेकर जमकर हड़काया। उन्होंने कालबद्ध करके इन मामलों के अनुपालन का आदेश दिया।


मंगलवार को विश्वविद्यायों के लॉ अफसरों के साथ आहूत बैठक में श्री पाठक ने वर्ष 2006 तक के लम्बित 84 मामलों का अनुपालन एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने का आदेश दिया। उन्होंने लॉ अफसरों को साफ निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर आयोजित 12 अगस्त की बैठक में कोर्ट आदेश के अनुपालन से सम्बंधित कागजातों के साथ ही आएं। श्री पाठक ने निर्देश दिया कि वर्ष 2006 तक के अवमानना मामलों को निपटाने के बाद वर्ष 2007 के तमाम मामलों को एक साथ खत्म करें और फिर वर्ष 2008 के मामलों को। मानव संसाधन सचिव के इस सख्त आदेश के बाद विश्वविद्यालयों के लॉ अफसरों के पसीने छूटने लगे कि कैसे वे इन मामलों का निपटारा महज सात दिन के भीतर करेंगे। लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सचिव का साफ आदेश है कि जब तक विश्वविद्यालय कोर्ट के मामलों से उबरेगा नहीं, उसके विकास की बात कैसे तय होगी। बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक सचिव ने पहले लंबित अवमाननावाद की प्रकृति की जानकारी ली। अधिसंख्य मामले सेवानिवृत्ति, पेमेंट एरियर, सैलरी, एफिएलेशन और सर्विस मैटर से जुड़े हैं।

जिनके भुगतान के लिए विश्वविद्यालयों को सरकार से पैसे भी मिल चुके हैं, कोर्ट ने भी कई मामलों में भुगतान का आदेश दिया पर, सम्बंधित व्यक्ति को विश्वविद्यालय ने पैसा नहीं दिया है। ऐसे ही एक मामले में सोमवार की बैठक में भी सचिव सख्त थे। कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय ने इसी मद के डेढ़ लाख रुपए का एफडी कर दिया है। कुछ पैसे डायवर्ट भी किए गए। इस बाबत आडिटर की रिपोर्ट से सचिव चौंक गये। उन्होंने कहा कि यह तो एफआईआर का मामला बनता है। आडिट रिपोर्ट की छानबीन की जाएगी। अगर मामला गबन का बनेगा तो कार्रवाई की जाएगी।

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