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टीचर की भूमिका में दिखे पासवान

 . . और पासवान पुरानी यादों में खो गये। दलित स्टूडेंटस फेडरेशन के राज्यस्तरीय सम्मेलन में वे टीचर की भूमिका में दिखे। कुर्सी और भाषण देने वाला डैस छोड़ मंच के सामने आये और फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष अमित कुमार को बगल में खड़ा कर बताया कि कैसे वह महेन्द्रू कल्याण छात्रवास की राजनीति कर केन्द्रीय मंत्री बने। छात्रों के उत्साह को देख उन्होंने शीघ्र ही गांधी मैदान में दलित छात्रों की रैली करने की घोषणा भी कर दी। उपस्थित छात्रों को अपना नाम, पूरा पता, फोन नम्बर उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए बताया कि पार्टी के कम्प्यूटर में यह सब फीड रहेगा और सभी को पार्टी की गतिविधियों की सूचना दी जाएगी।


उन्होंने प्रदेश के सभी कल्याण छात्रवासों से सम्मेलन में भाग लेने पटना आये छात्रों को अधिकार प्राप्त करने के लिए संघर्ष करने की नसीहत दी। पासवान ने कहा-मैं वर्ष1965 में पटना विश्वविद्यालय से एमए और लॉ की पढ़ाई करने के लिए पहली बार पटना आया और छात्रवास की समस्या को ले संघर्ष शुरू किया। 1967 में सूबे में संविद सरकार बनी तो सरकार की नजर गई और कदमकुंआ में किराये का तीन मंजिला भवन छात्रवास के लिए आवंटित हुआ। इसके बाद मैं एमएमए बन गया। उन्होंने फेडरेशन की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा कि 3 लाख बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए आंदोलन हो। छात्रवास भयावह हो गये हैं। वहां सांप निकलते हैं। निर्माण के लिए छात्र आंदोलन करते हैं तो राज्य सरकार उन्हें माओवादी करार देती हैं। सरकार को इसका जवाब मिलना चाहिए।

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