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शिक्षा अधिकार कानून संबंधी बिल संसद में पास

शिक्षा अधिकार कानून संबंधी बिल संसद में पास

छह से चौदह साल के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा देने के उद्देश्य से लोकसभा में लाए गए शिक्षा अधिकार विधेयक पर मंगलवार को चर्चा के दौरान सदस्यों ने प्रस्तावित शिक्षा अधिकार कानून के कारगर क्रियान्वयन के लिए समुचित निगरानी तंत्र बनाने तथा इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों के कंधे पर डालने के बजाय खुद केन्द्र को यह जिम्मेदारी उठाने की जरूरत पर बल दिया।

कांग्रेस की डा. गिरिजा व्यास ने कहा कि सबको शिक्षा देने के सपने को साकार करने के लिए जरूरी है कि इसे लागू करने वाली संस्थाएं प्रतिबद्ध तथा सक्रिय हो। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में राज्यों की जिम्मेदारियों को सुनिश्चित किया जाना जरूरी है साथ ही साथ सरकार समाज परिवार और शिक्षक सभी की मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में स्कूलों में शिक्षकों द्वारा यौन शोषण एवं अत्याचार की कई घटनाएं सामने आई हैं और इस विधेयक में इसे भी शामिल किया जाना चाहिए।

समाजवादी पार्टी की जयाप्रदा ने कहा कि केवल कानून बनाने से सबको शिक्षा मुहैया नहीं करायी जा सकती है बल्कि इसे सख्त बनाना होगा अन्यथा जो हश्र बाल श्रम निरोधक कानून का हुआ वही हश्र इस कानून का भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि अक्सर केन्द्र सरकार की योजनाओं को लागू करने में राज्य सरकारें दिलचस्पी नहीं लेती और इसलिए जरूरी है कि केन्द्र सरकार स्वयं इसे लागू करने तथा इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ले।

जनता दल (यूनाइटेड) के मणिलाल मंडल ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि सरकार सबको शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राइवेट संस्थाओं पर निर्भरता बढ़ा रही है लेकिन प्राइवेट स्कूलों पर निर्भर रह कर इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता है।

बहुजन समाज पार्टी के डा. बालिराम ने सभी गरीब बच्चों को स्कूलों में आकर्षित करने के लिए माता-पिता की मानसिकता में बदलाव लाने की आवश्यकता बताई, उन्होंने अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था के लिए राज्यों को केंद्र से अधिक से अधिक धन दिए जाने का अनुरोध किया।

तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि दूरदराज रहने वाले 14वर्ष तक के बच्चों की वास्तव में अनिवार्य शिक्षा देने के लिए दोपहर के भोजन के अतिरिक्त और उपाय भी किए जाने चाहिए। उन्होंने एक समान पाठक्रम की आवश्यकता भी बताई और कहा कि पाठक्रम का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

द्रमुक के टीआर बालू ने कहा कि 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना था कि बच्चों के लिए स्कूल एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर नहीं होना चाहिए।

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