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फर्जी मुठभेड़ मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी बरी

केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की स्थानीय अदालत ने 1990 के एक कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सबूतों के अभाव में पूर्व पुलिस अधीक्षक मोहिंदर सिंह सिद्धू तथा उपाधीक्षक किशन सिंह को बरी कर दिया है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए थे। सिद्धू उस समय अमृतसर जिले के कथुनंगल थाने के थाना प्रभारी एसएचओ तथा किशन सिंह उसी थाने में सहायक उप निरीक्षक थे। यह मामला चाविंडा देवी गांव के सुखविंदर सिंह उर्फ नीटा के 27 अगस्त 1990 को लापता होने का है। नीटा के भाई भूपिंदर सिंह ने कई सरकारी अधिकारियों को इस बारे में लिखा और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी न्याय की गुहार लगाई। उसने आरोप लगाया कि पुलिस उसके भाई को अवैध ढंग से उठाकर ले गई और उसे फर्जी मुठभेड़ में मार दिया।

उच्च न्यायालय ने अमृतसर के तत्कालीन सहायक उपायुक्त हरभूपिंदर सिंह नंदा को मामले की जांच के आदेश दिए।

जांच में उसके लापता होने की पुष्टि हुई। परिवार ने फिर इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने सीबीआई को जांच के लिए निर्देश दिए। इसमें दोनों पुलिस कर्मियों को दोषी बताया गया और हत्या
का मामला दर्ज करने को कहा। मुकदमे के लिए सीबीआई की विशेष अदालत में दोनों के विरूद्ध चालान पेश किया लेकिन सबूतों के अभाव में दोनों बरी हो गए।

बचाव पक्ष के वकील एस एस कलेर ने दलील दी कि सुखविंदर के आतंकवादी संगठन के साथ संबंध थे और पुलिस उसके घर पर नियमित रूप से जाती थी। उसका शव नहीं मिला है इसलिए यह कहना मुश्किल है
कि वह जीवित है अथवा उसकी मौत हो गई।

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