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उप्र में सूखे की वजह से पौधारोपण अभियान को झटका

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में हरियाली बढ़ाने की कवायद सूखे की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश के दो तिहाई जिलों के सूखाग्रस्त हो जाने से राज्य सरकार के पौधारोपण अभियान को करारा झटका लगा है।

प्रदेश सरकार ने इस साल 1 जुलाई से 15 अगस्त तक 8.19 करोड़ पौधे रोपे जाने का लक्ष्य रखा था। इनमें से अकेले वन विभाग को 78227 हेक्टेयर वनभूमि पर 7.24 करोड़ पौधे रोपने थे। शेष 95.99 लाख पौधे रोपने की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास, लोक निर्माण विभाग व सहकारिता विभागों सहित अन्य दूसरे सरकारी विभागों को सौंपी गई थी।

इसके लिए प्रदेश सरकार की तरफ से करीब 75 करोड़ रुपये से भी आवंटित कर दिए गए, लेकिन सूखे के कारण अभियान को करारा झटका लगा है।

अल्प बारिश के कारण राज्य सरकार ने जुलाई के आखिरी सप्ताह में प्रदेश के कुल 71 में से 58 जिलाें को तीन चरणाें में सूखाग्रस्त घोषित कर दिया।

अब अधिकारियों को आगामी 15 अगस्त तक 8.19 करोड़ पौधों को रोपने का लक्ष्य पूरा न कर पाने का डर सताने लगा है।

कानपुर के प्रभागीय वन अधिकारी बी.आर. अहिरवार ने मंगलवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि जल संकट के कारण पैधारोपण अभियान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जो पौधे लग चुके हैं उन्हें शुष्क मौसम और तपती गर्मी के कारण बचाना हमारे लिए बहुत मुश्किल साबित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए पौधारोपण अभियान का लक्ष्य प्राप्त करना बहुत कठिन लग रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक कानपुर में अब तक सिर्फ 35 फीसदी पौधों का रोपण हो पाया है। 15 अगस्त तक यहां 11 लाख 55 हजार 700 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित है।

प्रदेश के दूसरे मंडलों आगरा, बरेली, गोरखपुर, बस्ती, लखनऊ, झांसी और फैजाबाद में भी कमोवेश अभियान का यही हाल है।

प्रदेश में इस साल एक भी जिले में सामान्य से ज्यादा बारिश नहीं हुई। ज्यादातर जिलों में सामान्य से 50 फीसदी से कम बारिश हुई। झांसी, कन्नौज, एटा, चित्रकूट और रामपुर जिलों में तो सामान्य से 80 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।

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