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अमेरिकियों की गवाही पर फैसला कल

अमेरिकियों की गवाही पर फैसला कल

मुंबई हमले के मामले की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने एक प्रकरण में तीन अमेरिकी नागरिकों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गवाही के बारे में फैसला बुधवार तक सुरक्षित रखा है। विशेष न्यायाधीश एमएल ताहिलियानी ने दोनों पक्ष सुनने के बाद फैसला कल तक सुरक्षित रखा।

पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के वकील अब्बास काजमी ने सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए करने का विरोध किया। उनका कहना था कि किसी भी ऐसे देश का गवाह जिसका भारत के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर करार हो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गवाही दे सकता है पर उन्हें पता नहीं कि अमेरिका-भारत के बीच ऐसा कोई करार है।

इस पर विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच इस तरह का करार है। तब बचाव वकील ने उसकी प्रति मांगी। काजमी ने कहा कि यदि गवाह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गलत बयान देता है या अदालत की अवमानना की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कैसे की जाएगी। काजमी के अनुसार ऐसे में उस गवाह के खिलाफ कोई कार्रवाई करना मुश्किल होगा।

इस पर निकम का कहना था कि अभियोजन पक्ष पूरी सतर्कता बरतेगा कि गवाह कोई गलत बयानी न करे। सरकारी वकील ने यह भी कहा कि अमेरिकी नागरिकों को यदि गवाही के लिए भारत बुलाया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसके अलावा मामला लंबा भी खींच जाएगा और अनावश्यक खर्च होगा।

निकम ने अदालत को अर्जी देकर फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) के दो अधिकारियों समेत पांच अमेरिकियों की गवाही दर्ज करने का अनुरोध किया था। अर्जी में कहा गया था कि एफबीआई अधिकारी गवाही देने अदालत में आएंगे, जबकि तीन अमेरिकी नागरिक वीडियो कांफ्रेंस से गवाही देंगे। उन्होंने अर्जी में अदालत से इन गवाहों की पहचान सार्वजनिक न करने का भी अनुरोध किया था। उल्लेखनीय है कि एफबीआई अधिकारियों ने आतंकवादी हमले की जांच में मुंबई पुलिस की मदद की थी और आतंकवाद का शिकार बने स्थलों का निरीक्षण भी किया था।

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